अपनी जान को खतरे में डालकर वीरता एवं साहस का परिचर देते हुए दूसरों की जान बचाने पर उत्तराखंड के इन 'बाल वीरों' की साहस की दास्तान सुन आप भी इन्हें सलाम करेंगे।
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उत्तराखंड की दो छात्राओं सहित तीन बच्चों के नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। केंद्र को जो तीन नाम भेजे गए हैं। उसमें दून के सुमित ममगाई भी शामिल हैं। सुमित ने गुलदार से अपने चचेरे भाई रितेश की जान बचाई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
दून के फुलेत गांव निवासी 16 वर्षीय सुमित ममगाई आठ नवंबर 2015 को अपने चचेरे भाई रितेश के साथ गांव के पास पशुओं के लिए चारा लेने जा रहा था। इस बीच सुमित के चचेरे भाई के सिर पर गुलदार से झपटा मार दिया।
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भाई पर गुलदार के झपटते ही सुमित ने गुलदार की पूछ खींचकर पाठल से उस पर वार किया। इससे गुलदार घबराकर भाग गया। गुलदार के भागने के बाद सुमित ने गुलदार के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए रितेश को अपने कंधे पर उठाकर घर पहुंचाया। 108 की मदद से उसे दून अस्पताल ले जाया गया।
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सुमित के इस अदम्य साहस पर उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद की ओर उसके नाम की संस्तुति राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2016 के लिए की गई है।
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वहीं अल्मोड़ा जनपद की बजेल गांव निवासी बबीता जलाल ने 16 जून 2016 को अपनी जान की परवाह किए बगैर उफनाते गदेरे में कूदकर 61 वर्षीय बुजुर्ग महिला शांति देवी और 40 वर्षीय प्रेमा देवी को बहने से बचाया था।
जबकि ऊधमसिंह नगर वंदिया गांव किच्छा की 14 वर्षीय नवीं कक्षा की छात्रा कनिका गुप्ता ने 28 जून 2016 को तीन वर्षीय अल्का की करंट से जान बचाई। अल्का ने खेल-खेल में होल्डर को पकड़ लिया था। करंट लगते ही कनिका ने बिजली के तार पर झाडू मारकर बच्ची को बचाया।