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चमोली जल प्रलय: लापता लोगों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू, इस तरह जारी होंगे मृत्यु प्रमाणपत्र 

Wed, 24 Feb 2021 09:46 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर(चमोली)
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चमोली में आपदा - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के चमोली जिले में सात फरवरी को आई आपदा में लापता व्यक्तियों को मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला मजिस्ट्रेट स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार लापता लोगों के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तीन श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। प्रथम श्रेणी में आपदा प्रभावित व निकटवर्ती स्थानों के स्थायी निवासी के लापता व्यक्तियों के उत्तराधिकारी या निकट संबंधी लापता या मृत्यु के संबंध में शपथ पत्र के साथ निवास स्थान पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराते हुए लापता व्यक्ति की पूरी जानकारी देंगे। जहां से व्यक्ति लापता हुआ यह रिपोर्ट संबंधित पुलिस स्टेशन भेजी जाएगी। प्रथम सूचना रिपोर्ट और पुलिस रिपोर्ट के साथ लापता व्यक्ति का परिचय साक्ष्य के साथ आपदा प्रभावित क्षेत्र के अभिहित अधिकारी (परगना अधिकारी /एसडीएम) को भेजी जाएगी। अभिहित अधिकारी की जांच के बाद लापता व्यक्तियों की सूची समाचार पत्र, सरकारी गजट एवं सरकारी वेबसाइट पर प्रकाशित कर 30 दिन के भीतर आपत्तियां मांगी जाएगी। कोई आपत्ति या दावे नहीं होने पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। दूसरी श्रेणी में उत्तराखंड के अन्य जिलों और तीसरी श्रेणी में अन्य राज्यों के निवासी शामिल हैं। इसमें भी लापता व्यक्ति के उत्तराधिकारी शपथ पत्र के साथ लापता या मृत्यु की प्रथम रिपोर्ट के साथ जानकारी देंगे।
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चमोली में आपदा - फोटो : अमर उजाला
मूल जनपद के जांच अधिकारी लापता व्यक्ति की दर्ज रिपोर्ट के संदर्भ में देहरादून स्थित लापता व्यक्ति प्रकोष्ठ या मूल राज्य के नई दिल्ली स्थित स्थानिक आयुक्त कार्यालय के डेटाबेस सहित अन्य अभिलेखों के आधार पर जांच कर आख्या प्रभावित क्षेत्र के जांच अधिकारी को भेजेंगे। जांच के बाद इसे संबंधित के मूल जिले या राज्य के अभिहित अधिकारी को भजेंगे। 
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चमोली आपदा में लापता लोगों की खोज - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि तपोवन सुरंग और बैराज साइट से मलबा हटाने और लोगों की तलाश का अभियान आपदा के 18वें दिन भी जारी रहा। हालांकि बुधवार को यहां कोई शव नहीं मिला है। मंगलवार को भी शव बरामद नहीं हुए थे। बैराज साइट में पानी आने से रोकने के लिए धौली नदी को दाहिने ओर मोड़ने के लिए काम किया जा रहा है। आपदा के समय बैराज साइट के गेट पर भारी भरकम पत्थर आ गया था, जिससे नदी का  पानी बैराज की तरफ मुड़ रहा था।

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चमोली आपदा में लापता लोगों की खोज - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार शाम को यहां बोल्डर हटाने के लिए ब्लॉस्ट किया गया था, जिससे पानी नहीं आने से बैराज साइट में शवों की तलाश में आसानी होगी।  वहीं, ऑपरेटरों का कहना है कि वह सिर्फ एक ही बात सोचते हैं कि जितनी जल्दी हो सके वह सुरंग से पूरा मलबा हटा सकें। सुरंग से मलबा हटाने का काम चल रहा है। इसमें सबसे आगे रहकर जेसीबी और लोडर ऑपरेटर काम कर रहे हैं। पिछले 18 दिन से सुरंग के अंदर से मलबा हटाने में दिनरात जुटे जेसीबी ऑपरेटर अमित भट्ट, राजेश चौधरी और लोडर ऑपरेटर जयदेव लाल रेस्क्यू अभियान में पहले दिन से सुरंग के अंदर से मलबा हटाने में जुटे हुए हैं।
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चमोली में आपदाग्रस्त क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
उनका कहना है कि सुरंग के अंदर कितनी भी विकट परिस्थिति रही हो, उन्होंने इसकी कभी चिंता नहीं की है। हालांकि खुद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वह काम कर रहे हैं। दरअसल सुरंग के अंदर काम करना काफी मुश्किल भरा है। लगातार पीछे से मलबा आने और पानी निकलने से काम और भी मुश्किल हो रहा है। अंदर मशीन को संचालित करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। ऑपरेटरों का कहना है कि हमारा लक्ष्य अंदर फंसे लोगों तक जल्दी से जल्दी पहुंचना है।
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