चमोली में आपदाग्रस्त क्षेत्र
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जोशीमठ के चौरमी गांव निवासी महेंद्र के माता-पिता, पत्नी और दो मासूम बच्चे आपदा के 15 दिन बाद भी उसके आने की राह देख रहे हैं। महेंद्र से साथ परियोजना में कार्यरत संदीप ने बताया कि आपदा वाले दिन महेंद्र बैराज साइट पर कार्य कर रहे थे। जैसे ही ऋषि गंगा का सैलाब परियोजना की ओर बढ़ने लगा, तो महेंद्र अपनी जिंदगी की परवाह किए बगैर बैराज साइट की ओर दौड़ पड़े।