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चमोली आपदा: जल प्रलय से मची तबाही से चारों तरफ फैला मबला, अब खड़ी हुई एक नई चुनौती

Tue, 09 Feb 2021 10:22 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर(चमोली)
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चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला
उत्तरखंड के ऋषिगंगा की बाढ़ से मची तबाही से वर्तमान चुनौतियों से निपटने की जद्दोजहद जारी है, लेकिन बाढ़ ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। नदी में भारी मात्रा में गाद भरने से उसका तल काफी ऊपर उठ गया है। रैणी से लेकर चमोली, नंदप्रयाग तक नदी में कहीं भी पत्थर (नदी के बीच और किनारे केबड़े बोल्डर) नजर नहीं आ रहे हैं।
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चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला
नीचे भी नदी में पूरी तरह से सिल्ट जमने से नदी काफी ऊपर बह रही है। गाद में नदी पूरी तरह से समतल नजर आ रही है। बरसात में पानी ज्यादा बढ़ने पर यह सिल्ट यदि बहकर नीचे जाती है, तो यह मैदानी क्षेत्रों में भी नुकसान पहुंचा सकती है। 
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चमोली में ग्लेशियर फटने के बाद धौली नदी में मलबा - फोटो : अमर उजाला
खासकर नदी किनारे बसे कस्बों और गांवों में यह गाद ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।वहीं नदी के इतने लंबे एरिया से इस गादको हटाना शासन प्रशासन के लिए किसी भी तरह से संभव नहीं हो पाएगा। 

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चमोली में आपदा - फोटो : अमर उजाला
चमोली जिले में आई आपदा के बाद शासन-प्रशासन यहां लापता लोगों की खोज में जुटा है, लेकिन जिन लोगों ने इस आपदा में अपनों और परिचितों को खोया है वह इस आपदा को कभी नहीं भूल पाएंगे। रैणी गांव निवासी संग्राम सिंह, शंकर सिंह, पूरण सिंह ने कहा कि जो मंजर हम लोगों ने देखा और उसके बाद यहां जिस तरह के हालात हैं वह काफी डराने हैं। 
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चमोली में आपदा - फोटो : अमर उजाला
अभी तो यहां पर सरकारी तंत्र मौजूद है, लेकिन रेस्क्यू पूरा होने पर सब लोग यहां से चले जाएंगे। हमें तो यहीं इसी माहौल में रहना है। जब भी आपदा आएगी खौफनाक मंजर सामने आ जाएगा। क्षेत्र के कई लोग लापता हैं, वह दर्द तो कभी जहन से निकल नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे इलाके का वैज्ञानिक अध्ययन कराकर वस्तुस्थिति से ग्रामीणों को अवगत कराना चाहिए। 
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