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चमोली आपदा: शादी के बाद काम पर लौटा था मनीष, जल प्रलय में नहीं लग रहा कोई सुराग, कई जिंदगियां हुईं लापता

Sat, 13 Feb 2021 02:25 AM IST
अलका त्यागी प्रमोद सेमवाल, अमर उजाला, तपोवन
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आपदा के बाद अपनों की खोज में पहुंचे लोग - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में ऋषि गंगा की जल प्रलय में कई जिंदगियां लापता हैं। उनकी खोज में परिजन यहां छह दिनों से भटक रहे हैं। बिहार का मनीष कुमार तपोवन परियोजना में असिस्टेंट इंजीनियर का काम कर रहा था। बीते दिसंबर माह में मनीष की शादी हुई थी और तीन जनवरी को वह परियोजना में काम करने के लिए लौट आया था, लेकिन सात फरवरी के बाद से मनीष का कुछ पता नहीं है। ऋषि गंगा में आई जल प्रलय से करीब एक घंटे पहले मनीष ने पत्नी से बात कर घरवालों की कुशलक्षेम पूछी और सुरंग में काम करने के लिए जाने की बात कही थी। उसके ससुर अरविंद कुमार और भाई मृत्युंजय कुमार छह दिनों से मनीष के सुरंग से बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। 
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आपदा के बाद अपनों को खोजने आए लोग - फोटो : अमर उजाला
इस सैलाब में चमोली जिले के किमाणा गांव के तीन भाईयों की जोड़ी भी लापता है। सुरंग में किमाणा गांव के रामकिशोर, अरविंद और रोहित मजदूरी करने आए थे। अपने लापता भाईयों की खोज में तपोवन पहुंचे मनोज भंडारी ने बताया कि उसका भाई रामकिशोर और चाचा का लड़का अरविंद व रोहित एक साथ सुरंग में गए थे, लेकिन आपदा के बाद से उनका कुछ पता नहीं है। सहारनपुर के सेकपुरा गांव का अबराल और फैजान छह दिनों से रैणी गांव में हैं। 
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चमोली में आपदा के बाद अपनों की खोज में परिजन - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उनके दो भाई चांद और जीसान ऋषि गंगा परियोजना में मजदूरी करते थे। एक फरवरी को ही दोनों भाई ठेकेदार के माध्यम से परियोजना में मजदूरी करने पहुंचे थे। अबराल ने बताया कि चांद का सुबह नौ बजे फोन आया था, लेकिन बात नहीं हो पाई। वे अपने भाईयों की तलाश में दिनभर भटक रहे हैं। अबराल ने बताया कि अब तो खाने की इच्छा भी नहीं हो रही है। घर से फोन आ रहे हैं, उन्हें कुछ भी जवाब नहीं दे पा रहा हूं। 

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चमोली में आपदा के बाद अपनों की खोज में परिजन - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
चकराता देहरादून का गजेंद्र सिंह सुरंग में फंसे अपने बड़े भाई विक्रम चौहान की खोज में दिनभर बैराज और सुरंग साइट रेस्क्यू टीमों को उम्मीदभरी नजरों से देख रहा है। गजेंद्र ने बताया कि आपदा की सुबह नौ बजे विक्रम से बात हुई थी। उन्होंने घरवालों की राजी खुशी पूछी, लेकिन आपदा ने हमारा सुख-चैन ही छीन लिया है। मैं अपने भाई के बिना किस मुंह से घर लौटूं।
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अभिषेक पंत - फोटो : अमर उजाला
तपोवन का अभिषेक पंत बीटेक करने के बाद तीन साल से तपोवन परियोजना में बतौर इंजीनियर कार्य कर रहा था। आपदा के दिन अभिषेक अपने दोस्तों के साथ ढाक गांव में क्रिकेट खेलने जा रहा था, लेकिन सुबह करीब साढे़ नौ बजे उसे परियोजना से किसी का फोन आया कि सुरंग की बिजली लाइन में फॉल्ट आ गया है। उसने दोस्तों से कहा कि मैं फॉल्ट देखकर पांच मिनट में आता हूं, तब क्रिकेट खेलने चलते हैं, लेकिन इसी दौरान आपदा ने सुरंग को घेर लिया। तब से अभिषेक का कुछ पता नहीं है। अभिषेक की अप्रैल माह में सगाई थी। 
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