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चमोली आपदाः ऋषिगंगा के मुहाने पर बनी झील से बाढ़ का खतरा टला, होने लगा रिसाव, तस्वीरें...

Sat, 13 Feb 2021 07:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
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चमोली जिले में ग्लेशियर फटा: ऋषि गंगा में बनी झील - फोटो : अमर उजाला
ऋषिगंगा के मुहाने पर बनी झील से पानी का रिसाव होने लगा है, जिससे बड़ा खतरा टल गया है। झील की जो तस्वीर मिली हैं, उसमें पानी का रिसाव हो रहा है, जो शुभ संकेत हैं। 
 
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ऋषि गंगा में बनी झील - फोटो : आपदा प्रबंधन विभाग, उत्तराखंड
गढ़वाल आयुक्त रविनाथ रमन ने बताया कि झील का निरीक्षण करने के लिए डीआरडीओ और केंद्र सरकार की आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर भेजी गई है। टीम से जानकारी मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। झील में पानी का रिसाव हो रहा है, जो शुभ संकेत हैं। 
 
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ऋषिगंगा में यहां बनी है झील - फोटो : अमर उजाला
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक एसडीआरएफ की टीम रैणी गांव के अपस्ट्रीम वाले एरिया में पहुंच गई है। वहां से एक झील दिखाई दे रही है जो करीब 350 मीटर लंबी है। झील से पानी का रिसाव हो रहा है। टीम के लौटने पर और जानकारी साझा की जाएगी।

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rishiganga lake - फोटो : अमर उजाला
ऋषिगंगा में आई बाढ़ और उससे उत्पन्न स्थिति का अध्ययन करने के लिए प्रदेश सरकार ने नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। सचिव (आपदा प्रबंधन) एसए मुरुगेशन ने कमेटी गठित करने के आदेश दे दिए हैं।
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ऋषि गंगा में बनी झील - फोटो : आपदा प्रबंधन विभाग, उत्तराखंड
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक की अध्यक्षता में गठित इस नौ सदस्यीय समिति में भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के उपनिदेशक, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक के नामित प्रतिनिधि, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के निदेशक के नामित प्रतिनिधि, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के प्रतिनिधि, टिहरी जल विद्युत परियोजना, ऋषिकेश के निदेशक तकनीकी के नामित प्रतिनिधि, उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक, निदेशक उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) या उनके नामित प्रतिनिधि को सदस्य बनाया गया है।
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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला
शासन स्तर पर गठित कमेटी आपदा मामलों की जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट का विश्लेषण करेगी। विश्लेषण के बाद समिति सरकार को अपनी सिफारिश देगी, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान माल के नुकसान को कम किया जा सके। समिति के अध्यक्ष डॉ.पीयूष रौतेला के मुताबिक इसमें 10 से 15 दिन का समय लगेगा। कमेटी स्थलीय निरीक्षण भी करेगी। अभी कमेटी को बाढ़ और झील बनने से संबंधित विषय का अध्ययन करना है।
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