बुधवार को देवभूमि उत्तराखंड में हो रहे 'दंगल' में हो रहे मतदान में सूबे के इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। आइए जानते हैं इनके बारे में...
सूबे के सीएम हरीश खुद शाह मात के खेल में फंसे हैं। खुद को खांटी पहाड़ी कहने वाले हरीश रावत मैदानी क्षेत्र की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे है। हरीश रावत के राजनीतिक कौशल से कांग्रेस मुकाबले में तो है लेकिन सत्ता वापसी की चुनौती के अलावा अपने गढ़ कुमाऊं में खुद को साबित करने की परीक्षा में भी पासिंग मार्क्स से काम नहीं चलेगा।
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Indira Hridayesh
- फोटो : ani
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस ही नहीं राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ है जो अपने दम पर सियासत करती है। चुनाव जीती और संख्याबल बहुमत की कसौटी पर खरा उतर तो वह मुख्यमंत्री के पद की दावेदार होंगी और चुनाव हार गयी तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा।
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प्रीतम सिंह
- फोटो : AmarUjala
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में है। चकराता क्षेत्र में मंदिर में दलितों को प्रवेश करने से रोकने का मामला उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
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विजय बहुगुणा
- फोटो : AmarUjala
पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के साथ भाजपा में आये नौ क्षत्रपों को जिताना उनकी जवाबदेही में शामिल हो गया है। बहुगुणा पर अपनी राजनीतिक विरासत को सितारगंज से बेटे सौरभ बहुगुणा की जीत दिलवा कर आगे बढ़ाने का दबाव भी है।
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सतपाल महाराज
- फोटो : AmarUjala
केंद्र की राजनीति छोड़ प्रदेश की सियासत में कूदे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सतपाल महाराज की भूमिका इस चुनाव से तय होगी। सीएम की रेस में माने जा रहे महाराज को चौबट्टाखाल से जीतने का दबाव है।
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yashpal arya
कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कैबिनेट मंत्री यशपाल के परिवार की साख इस चुनाव से जुड़ी है। उनके बेटे संजीव आर्य भी रानीखेत से प्रत्याशी हैं, अपने साथ बेटे को जीता कर आर्य अपना कद बढ़ा कर पाते हैं या नहीं, यह 11 मार्च को तय होगा।
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हरक सिंह रावत
- फोटो : AmarUjala
हरक सिंह रावत हरक सिंह रावत कोटद्वार से भाजपा की ओर चुनावी दंगल में किस्मत आजमा रहे हैं।
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गोविंद सिंह कुंजवाल
- फोटो : अमरउजाला
जागेश्वर से कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की प्रतिष्ठा दांव पर है।