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हिल स्टेशन मसूरी के ऐसे 'राज' जिन्हें जानना बेहद जरूरी है

Mon, 30 Nov 2015 11:55 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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हमेशा से मसूरी उत्तर भारत के लोगों के लिए सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 34 किमी की दूरी पर मौजूद पहाड़ों की रानी मसूरी 1880 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां आने वाले हर पर्यटक को मसूरी तरो-ताजा कर देती है। आइए जानते हैं मसूरी के चौंकाने वाले 'राज'...
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मसूरी के वो 'खास राज', जो आपने नहीं सुने होंगे

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पहाड़ों की रानी मसूरी देसी और विदेशी हस्तियों की पहली पसंद रही है। इस घाटी की सुंदरता हर किसी को अपना मुरीद बना लेती है। बॉलीवुड अभिनेता देवानंद की सबसे पसंदीदा जगह मसूरी रही, यहां उनका एक घर भी है। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी अक्सर अपने परिवार के साथ मसूरी आते हैं।
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मसूरी के वो 'खास राज', जो आपने नहीं सुने होंगे

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भले ही मसूरी को अंग्रेजों से बसाया हो, लेकिन इसका नाम एक दम स्वदेशी है। जो एक झाड़ी मंसूर से लिया गया है। यह झाड़ी मसूरी में काफी मात्रा में पाई जाती थी। अभी भी कई लोग मसूरी को मंसूरी के नाम से बुलाते हैं। मसूरी की खोज के बारे में बात करें तो इसकी खोज एक युवा ब्रिटिश सैन्य अधिकारी युंग और देहरादून निवासी मिस्टर शोर द्वारा मिलकर की गई थी।

मसूरी के वो 'खास राज', जो आपने नहीं सुने होंगे

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माल रोड से जहां एक ओर मसूरी की हरी भरी वादियों के नजारे दिखाई देते हैं तो वहीं यहां नए विवाहित, प्रेमी जोड़े और युवाओं को घूमते देखा जा सकता है। माल रोड मसूरी की सबसे जीवंत जगह है।
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औपनिवेशिक शासन के दौरान गन हिल में ऊंची चोटी पर एक बंदूक रखी गई थी। रोजाना दिन में 12 बजे इस बंदूक से ‌फायरिंग होती थी, जिसके बाद लोग अपनी घंड़ी के समय का मिलान कर लेते थे। बाद में उस बंदूक को गन हिल से हटा दिया गया।
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अप्रैल 1959 में जब चीन ने तिब्बती गुरु दलाई लामा को निर्वासित किया, तब वह मसूरी में ही आए थे। बाद में वह यहां से धर्मशाला (‌हिमाचल) चले गए। अभी भी 5000 से ज्यादा तिब्बती मसूरी में रह रहे हैं।
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1901 में मसूरी की जनसंख्या केवल 6,461 इतनी थी जो 2001 में बढ़कर 26,069 हो गई। इस दौरान 100 साल में मसूरी की जनसंख्या में 400 प्रतिशत की वृद्घि हुई। 2011 की जनगणना के अनुसार मसूरी की जनसंख्या 30,118 है।

मसूरी के वो 'खास राज', जो आपने नहीं सुने होंगे

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मसूरी का सबसे ऊंचा ‌प्वॉइंट लाल टिब्बा 2,290 मीटर (7,510 फुट) ऊंचाई पर है, जहां से मसूरी की सुंदर वादियों का दीदार होता है। यहां से हिमालय रेंज को भी आसानी से देखा जा सकता है। इसलिए अगर मसूरी आए तो एक बार लाल टिब्बा जरूर जाएं।

मसूरी के वो 'खास राज', जो आपने नहीं सुने होंगे

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शायद आपको पता न हो लेकिन ब्रिटिश काल में भारतीयों को मसूरी आने की अनु‌मति नहीं थी। यहां माल रोड पर ब्रिटिश सरकार द्वारा दीवार पर लिखवाया गया था “Indians and Dogs Not Allowed”। लेकिन बाद में मोतीलाल नेहरू द्वारा यह नियम तोड़ा गया।
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मसूरी नेहरू परिवार के लिए पसंदीदा पर्यटन स्थल था और नेहरू परिवार (1920-40 के दौरान) मसूरी में लगातार आता था। पं. जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित का भी घर देहरादून के पास है।
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