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केदारनाथ के बाद अब भगवान शिव के इस धाम पर मंडरा रहा खतरा, ये है इसके पीछे की वजह

Tue, 24 Oct 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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tungnath highest temple of lord shiva
एक हजार साल पुराने भगवान शिव के सबसे ऊंचे शिवालय पर खतरा मंडरा रहा है। जानिए इसके पीछे की वजह...
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tungnath
साल 2013 में केदारनाथ धाम में आपदा आई थी। इसके बाद तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के धाम में भी खतरा पैदा हो गया है। यहां प्राचीन मंदिर के सभामंडप की दीवार के कई पत्थरों ने अपनी जगह छोड़ दी है। ये पत्थर बाहर के लिए खिसक रहे हैं, जिससे मंदिर के लिए खतरा बना है। हक-हकूकधारियों व प्रबंधन समिति ने शासन, प्रशासन से मंदिर की दीवारों की मरम्मत की मांग की है।
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tungnath
समुद्रतल से 3680 मीटर (12073 फीट) ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम विश्व का सबसे ऊंचाई वाले स्थान का शिव मंदिर है। पंचकेदार में तृतीय केदार के रूप में पूजनीय है, जहां भगवान आशुतोष के बाह भाग की पूजा होती है। लेकिन बीते वर्षो में भूकंप व क्षेत्र में आई आपदाओं के कारण मंदिर को खतरा पैदा हो रहा है। शंकराचार्य काल में निर्मित मंदिर की दीवारें जर्जर हो रही हैं।

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tungnath - फोटो : AmarUjala
सभामंडप की दीवार के ऊपरी कोने के पत्थर बाहर की ओर खिसक गए हैं, जिस कारण वहां काफी स्थान खाली हो गया है, जिसे छोटे-छोटे पत्थरों से भरने का प्रयास किया गया है, जो नाकाफी है। मंदिर पीछे की तरफ भी कई जगहों पर पत्थर अपनी जगह छोड़ रहे हैं। यहीं नहीं, धाम में मौजूद अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी जीर्णशीर्ण हो रहे हैं। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा और देखरेख को लेकर लंबे समय से शासन, प्रशासन को अवगत कराया जा रहा है।
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tungnath highest temple of lord shiva
लेकिन सुध नहीं ली जा रही है। इधर, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, सुबोध मैठाणी आदि का कहना है कि तृतीय केदार तुंगनाथ धाम निरंतर उपेक्षा की जा रही है। जून 2013 की आपदा के बाद भी यहां शासन, प्रशासन के आला अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। अगर, जल्द मंदिर संरक्षण को लेकर ठोस प्रयास नहीं किए गए तो, मंदिर की दीवारों के कटवा पत्थर कभी भी भरभरा कर ढह सकते हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम की तर्ज पर तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर की दीवारों की एएसआई के जरिए मरम्म्त की मांग की है।
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tungnath
तुंगनाथ धाम में राज्य निर्माण के 17 वर्ष बाद भी शासन, प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा जरूरी सुविधाओं को जुटाने का प्रयास नहीं किया गया है। चोपता से करीब 3.5 किमी दूरी पर बसे मंदिर में बिजली की कोई सुविधा नहीं हैं। यहां छिल्ले की रोशनी में अराध्य की पूजा होती है।
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tungnath highest temple of lord shiva
यहां तक कि यात्राकाल में मंदिर में रहने वाले लोगों को डेढ़ किमी दूर से पानी जुटाना पड़ता है। संचार व सफाई व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। ऐसे में श्रद्धालुओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहीं नहीं, करीब सात वर्ष पूर्व हुई मंदिर में चोरी का भी आज तक सुराग नहीं लग पाया है। बावजूद मंदिर की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं हैं। शीतकाल में मंदिर की सुरक्षा दो सुरक्षा गार्ड के भरोसे रहती है, जो रात्रि को चोपता पहुंच जाते हैं।
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बागेश्वर में अपराध समीक्षा बैठक लेते डीएम मंगेश घिल्डियाल। - फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के बेहतर से बेहतर संरक्षण को लेकर जल्द कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में मंदिर समिति व एएसआई के विशेषज्ञों से भी राय ली जाएगी। मैं स्वयं धाम जाकर वहां के हालातों का जायजा लूंगा।
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