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भगवान शिव के इस मंदिर में पूजा करने से डरते हैं लोग, जानिए इसका सच

Sun, 28 Jan 2018 02:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Ek Hathiya Deval Temple
भगवान शिव के भक्त चाहे उनकी किसी भी स्वरुप की पूजा करें, भगवान शिव भक्ति मात्र से प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनाकामनाएं पूरी करते है, ले‌किन  भगवान शिव के इस मंदिर में आने से लोग डरते है। जानिए क्या है सच..
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lord shiva - फोटो : getty images
 देशभर में भगवान शिव के ऐसे कई मंदिर है जहां लोग मत्था टेकने पहुंचते है, लेकिन क्या आप भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में जानते है। 
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Ek Hathiya Deval Temple
भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर जहां भारी तादात में शिव भक्तों का जमावड़ा तो लगता है लेकिन वो सभी बाहर से ही मंदिर का दीदार करके वापस लौट जाते हैं क्योंकि इस मंदिर में पूजा करने से सभी भक्तों को डर लगता है।

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Ek Hathiya Deval Temple
दरअसल भगवान शिव का यह प्राचीन मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले के हथिया नौला में स्थित है 'एक हथिया देवाल'।  कहा जाता है कि भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अभिशप्त है।
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Ek Hathiya Deval Temple
इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यहां आकर वो इस मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते हैं और वापस अपने घरों को लौट जाते हैं, लेकिन वो यहां पूजा नहीं करते हैं।

 
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Ek Hathiya Deval Temple
एक हाथ से बनाए जाने के कारण इसे एक हथिया देवाल मंदिर कहा जाता है।  यह मंदिर बहुत प्राचीन है जिसका जिक्र पुराने ग्रंथों में भी मिलता है।

 
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श‌िव महादेव - फोटो : shiv mahadev
कहा जाता है कि किसी समय यहां राजा कत्यूरी का शासन हुआ करता था। उस दौर के शासकों को स्थापत्य कला से बहुत लगाव था। यहां तक कि वे इस मामले में दूसरों से प्रतिस्पर्द्धा भी करते थे।

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shivling - फोटो : demo
लोगों का मानना है कि एक बार यहां किसी कुशल कारीगर ने इस मंदिर का निर्माण करना चाहा। इसके लिए वो काम में भी जुट गया और उसकी खासियत यह थी कि उसने एक हाथ से मंदिर का निर्माण शुरू करके एक रात में ही इसे साकार रुप दे दिया।

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श‌िव नटराज - फोटो : shiv natraj
मान्यताओं के अनुसार इस गांव में एक मूर्तिकार रहता था जो पत्थरों को काटकर मूर्तियां बनाया करता था,  लेकिन एक बार किसी दुर्घटना के चलते वो अपना एक हाथ खो देता है। एक हाथ गंवाने के बाद भी वो मूर्तियां बनाने का काम जारी रखना चाहता था, लेकिन गांववाले उसे अक्सर ताने दिया करते थे कि एक हाथ के सहारे वो क्या कर सकेगा।

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श‌िव पार्वती - फोटो : shiv parvati
बार-बार गांव वालों के ताने सुनकर उसका मन एकदम खिन्न हो गया था, जिसके बाद उसने ये ठान लिया कि वो उस गांव में नहीं रहेगा। यह प्रण करके वो एक रात अपनी छेनी, हथौड़ी और दूसरे औजार लेकर गांव के दक्षिणी छोर की ओर निकल पड़ा।

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श‌िव नंदी पर सवार - फोटो : shiv on nandi
अगले दिन सुबह जब गांव का एक आदमी इस दिशा में गया तो उसने पाया कि रातभर में किसी ने चट्टान को काटकर एक देवालय का रुप दे दिया है। यह देखकर सभी चौंक गए और सारे गांववाले इकट्ठा होकर एक हाथ वाले उस कारीगर का इंतजार करने लगे, लेकिन वो वापस नहीं लौटा ।

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श‌िव पूजा
उसने एक रात में भव्य मंदिर तो तैयार कर दिया था, लेकिन शिवलिंग का अरघा उत्तर दिशा में बनाने के बजाय दक्षिण दिशा में बना दिया था। यहां के लोगों का यह मानना है कि विपरित अरघा वाला यह शिवलिंग पूजन के योग्य नहीं है और इसे पूजने से कोई अनहोनी हो सकती है इसलिए आज तक किसी ने भी इस शिवलिंग की पूजा नहीं की।
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shivling - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि भगवान शिव के इस मंदिर में शिल्पकला का अद्भुत नमूना देखने को मिलता है लेकिन मंदिर में स्थित शिवलिंग का अरघा विपरित दिशा में होने के चलते लोग यहां सिर्फ दर्शन करने आते हैं और बिना पूजा किए ही वापस लौट जाते हैं।
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