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मुज्जफरनगर रेल हादसे का एक और सच आया सामने, यात्रियों ने खुद बताई चौंकाने वाली बातें

Mon, 21 Aug 2017 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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मुज्जफरनगर हादसे को लेकर एक और सच सामने आया है। हरिद्वार पहुंचे यात्रियों की आंखों में मौत का मंजर साफ नजर आ रहा है। घटना के 20 घंटे बीत जाने के बाद भी यात्रियों को बार बार हादसा याद आ रहा है। वहीं यात्रियों ने खुद कई चौंकाने वाले खुलासे क‌िए हैं। 
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हादसे में लोगों के साथ छीनाझपटी भी हुई। घायल यात्रियों के सामानों को लोगों ने छीन लिया, तो कई लोग डर के मारे दोबारा अपने सामान को लेने नहीं पहुंचे। कमल किशोर बताते है कि उनको बाहर निकालते समय उनके हाथ से एक टोपी वाले युवक ने बैग लिया ओर वहां से बैग लेकर फरार हो गया।
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 बुजुर्ग महिला शकुंतला बताती है कि उनको बाहर निकालते समय एक युवक ने बैग के बारे में जानकारी ली और दूसरे गेट से बैग लेकर चला गया। मध्यप्रदेश के रहने वाले अखिलेश और नागेंद्र बताते है कि उनका बैग ट्रेन में ही छूट गया। हादसे के बाद उनको अपना बैग उठाने में भी डर लग रहा था।  

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डरे सहमे यात्री अपने साथियों से उस घटना की बातचीत कर रहे है। यात्रियों के गांव से भी उनकी कुशलता पूछने वालों के फोन लगातार आ रहे हैं। हर कोई हादसे के बाद से डर गया है। हादसे में घायलों की बात करे तो वो रेलवे के अधिकारियों को इस घटना का दोषी मानकर चल रहे है। उधर कुछ महिलाएं तेज रफ्तार को भी घटना का कारण मान रही है। 
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ग्वालियर के गांव अजीरा मध्यप्रदेश के रहने वाले सतीश बताते है कि वह एस7 कोच में लेटे हुए थे कि अचानक वह नीचे गिर गए और देखते ही देखते उनका कोच एक तरफ से पलट गया। करीब 15 से 20 मिनट बाद होश आने के बाद उनको ट्रेन के ऊपर बने इमरजेंसी दरवाजे से निकाला गया। 
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अशोक अग्रवाल निवासी मध्यप्रदेश ने बताया कि वह उस कोच में थे जो कोच सीधा स्कूल में जाकर घुस गया। पूरी कहानी बताते हुए वह कई बार सदमे में नजर आए। यहां तक उनकीं आंखें तक लाल थी। उन्होंने बताया कि जैसे ही वह खड़े हुए वैसे ही गाड़ी डगमगाने लग गई।
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​उनके बाद कोच हवा में जाते हुए स्कूल की दीवार पर जा टकराया। इसके बाद पूरे कोच में शोर शराबा शुरू हो गया। उनके कोच में तीन लोगों ने अपनी जिंदगी खो दी, तो कई लोग गंभीर घायल हो गए।  उनको ज्यादा कुछ नहीं हुआ क्योंकि वह किसी के बैग के ऊपर गिरे। जिससे उनको चोटें नहीं आई।
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ग्वालियर निवासी प्रेमा और जानकी अपने आठ साथियों के साथ हरिद्वार गंगा स्नान को आ रहे थे। उनका कहना है कि ट्रेन की रफ्तार काफी तेज लग रही थी। प्रेमा बताती है कि ट्रेन की रफ्तार देख उनको डर लग रहा था। हादसे से कुछ देर पहले वह शौचालय गई थी। जब उन्होंने देखा कि ट्रेन की रफ्तार काफी अधिक है। उन्होंने जानकी को पहले ही अंदेशा जताया था कि ये ट्रेन वाला इस ट्रेन को पलटा न दे। यह बात उन्होंने रफ्तार को देखने के बाद कही थी। हादसे के बाद सभी यात्री प्रेमवती से इस बारे में चर्चा जरूर कर रहे थे।  
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