बच्चों के समर वेकेशन शुरू होने जा रहे हैं। भारत की इन दस डेस्टिनेशन पर आप बच्चों के साथ अच्छा समय गुजार सकते हैं। प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज उत्तराखंड का औली भारत का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। सूर्य की किरणें जब यहां की पर्वतों की श्रृंखला पर पड़ती हैं तो उसकी चमक देखते ही बनती है। यहां बर्फ से खेलने का आनंद कुछ और ही है। दिसम्बर से लेकर मार्च तक यहां ऐसा नहीं नजारा देखने को मिलता है। गर्मियों से बचना है तो आप इन गर्मियों की छुट्टी बिता सकते हैं।
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chopta
बारह से चौदह हजार फुट की ऊंचाई पर बसा चोपता-तुंगनाथ ट्रैक गढ़वाल हिमालय के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। जनवरी-फरवरी के महीनों में आमतौर पर बर्फ की चादर ओढ़े इस स्थान की सुंदरता जून-जुलाई-अगस्त के महीनों में देखते ही बनती है। इन महीनों में यहां मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और उनमें खिले फूलों की सुंदरता देखने योग्य होती है। इसीलिए इसकी तुलना स्विट्जरलैंड से की जाती है।
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dayara bugyal
दयारा बुग्याल उत्तरकाशी में समुद्री तल 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर स्थित भट्वारी नामक स्थान से इस खूबसूरत घास के मैदान के लिए रास्ता कटता है। दयारा बुग्याल पहुचने के लिए यात्रियों को बरसू गांवसे ट्रैकिंग द्वारा लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। सर्दियों के दौरान पर्यटक लगभग 28 वर्ग किमी में फैले इस क्षेत्र में ढलानों पर स्कीइंग का आनंद ले सकते हैं। यह जगह भी हिमालय का शानदार दृश्य प्रस्तुत करती है।
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rudranath
- फोटो : AmarUjala
रुद्रनाथ ट्रैक समुद्रतल से 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शंकर के एकानन यानि मुख की पूजा की जाती है, जबकि संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ में की जाती है। रुद्रनाथ मंदिर के सामने से नन्दा देवी और त्रिशूल की हिमाच्छादित चोटियां यहां का आकर्षण बढ़ाती हैं। गर्मी में यहां बेहद ठंड पड़ती है।
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valley of flowers
- फोटो : अमरउजाला
उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में स्थित वैली ऑफ फ्लावर्स को 'फूलों की घाटी' कहा जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय उद्यान है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान सम्मिलित रूप से विश्व धरोहर स्थल घोषित है। समुद्र तल से 3962 मीटर की ऊंचाई पर यह घाटी 87 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। हिमालयी नीली पॉपी, दुर्लभ ब्रह्म कमल, ऑरेंज पॉनीटेला, अस्ट्रालागस और रोज़ा जैसे तीन सौ से भी ज़्यादा फूल, फूलों की घाटी में अपनी छटा बिखेर रहे हैं।
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hemkund sahib
- फोटो : file photo
हेमकुण्ड साहिब या 'गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जी' सिक्खों का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो उत्तराखंड के चमोली ज़िले में स्थित है। हेमकुंड एक बर्फ की झील है, जो सात विशाल पर्वतों से घिरी हुई है, जिन्हें हेमकुंड पर्वत भी कहते हैं। हेमकुंड साहिब की यात्रा हिन्दुओं की पवित्र अमरनाथ यात्रा से भी जोड़ कर देखी जाती है। चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और यहां अभी भी बर्फ की छाटा बिखरी हुई है।
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madmaheshwar
- फोटो : amarujala
मदमहेश्वर जाने के लिए रुद्रप्रयाग जिले में ऊखीमठ तक जाना होता है। रुद्रप्रयाग से बस और जीप मिलती हैं। ऊखीमठ में मुख्य बाजार से सीधा रास्ता उनियाना जाता है जो आजकल मदमहेश्वर यात्रा का आधार स्थल है। उनियाना से मदमहेश्वर की दूरी 23 किलोमीटर है जो पैदल नापी जाती है। कुछ साल पहले तक यह यात्रा मनसून से शुरू होती थी। मनसून ऊखीमठ और उनियाना के बीच में है। गौण्डार से करीब डेढ किलोमीटर आगे खटरा चट्टी आती है। चट्टी यात्रियों के रुकने के स्थान को कहते हैं। यहां से मदमहेश्वर की दूरी सात किलोमीटर है।
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Deoria tal
गढ़वाल हिमालय की ओर जाने वाले सैलानियों के लिए देवरिया ताल भी एक दर्शनीय स्थल है। ऊखीमठ से पाली गांव होकर तथा दूसरे मस्तुराटाला से होकर सरी गांव तक टैक्सी से, फिर चार किमी की चढ़ाई पैदल चढ़कर इन दो मार्गों से देवरिया ताल पहुंचा जा सकता है। देवरिया ताल पहुंचने पर प्रकृति का अपूर्व सौंदर्य नजर आता है।
रानीखेत उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के अंतर्गत एक पहाड़ी पर्यटन स्थल है। देवदार और बलूत के वृक्षों से घिरा रानीखेत बहुत ही रमणीक लघु हिल स्टेशन है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 85 किमी. की दूरी पर स्थित यह अच्छी पक्की सड़क से जुड़ा है। इस स्थान से हिमाच्छादित मध्य हिमालयी श्रेणियां स्पष्ट देखी जा सकती हैं। प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग रानीखेत है। छावनी का यह शहर अपने पुराने मंदिरों के लिए मशहूर है।