पहाड़ में रहकर 'पहाड़' सी दिक्कतों से भी इन नन्हें होनहारों ने हार नहीं मानी। इन्होंने रोबोट की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया। पढ़िए इन होनहारों की कहानी...
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल की श्री तिमली विद्यापीठ के तीन छात्रों ने गुरुग्राम में आयोजित वर्ल्ड रोबोटिक्स ओलंपियाड में प्रतिभाग कर प्रदेश का नाम रोशन किया। उत्तर भारत के 40 से अधिक विश्वविद्यालयों में उत्तराखंड से तीन छात्रों की यह अकेली टीम थी। विद्यापीठ के आशीष डबराल ने बताया कि सोहन डबराल, निधि बलूनी, और रोहित रावत ने इसमें एलिमेंटी श्रेणी में भाग लिया।
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इसमें समुद्र तट पर रिजर्व फारेस्ट के किनारे खड़े जीतवों को सुरक्षित उनके निवास स्थान तक पहुंचाना था। छात्रों ने दो मिनट में रोबोट से कार्य कराकर सबको चौंका दिया।
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बता दें कि श्री तिमली विद्यापीठ संस्कृत पाठशाला का आधुनिक स्वरूप है। जिसकी स्थापना सन 1882 में की गई थी। 1910 से 1019 तक यह विद्यालय आधुनिक उत्तराखंड का एकमात्र मान्यताप्राप्त तथा ब्रिटिश शासन द्वारा अनुदानित विद्यालय रहा है।
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इसके आचार्य देवप्रयाग स्थित संस्कृत महाविद्यालय के संस्थापक रहे हैं। आचार्य ललिता प्रसाद डबराल जी 1932 में लाहौर के सनातन हिन्दू कॉलेज में वेदांत के विभागाध्यक्ष तथा उसके पश्चात बनारस संस्कृत महाविद्यालय में व्याकरणाचार्य के पद पर आसीन रहे।
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उन्होंने तंत्र तथा श्रीविद्या के क्षेत्र में उल्लेखनीय अनुसंधान कार्य किया तथा उनके लेख कल्याण आदि अनेक प्रकाशन में प्रकाशित हुए। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों को आज भी सम्पूर्णानंद संस्कृत महाविद्यालय में पाठ्यक्रम का हिस्सा है।
इस विद्यालय में गांव के जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाती है। यह उत्तराखंड का पहला विद्यालय है जिसमे विद्यार्थीओं को निशुल्क रोबोटिक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, विदेशों (अमेरिका तथा इंग्लैंड) के विद्यार्थियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।