उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में समुद्र तल से 14 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी जीव विज्ञानियों को चौंका दिया है। हिमालय का यह क्षेत्र हिम तेंदुओं का एकांतवास माना जाता है। लेकिन अब वहां बाघों (टाइगर) ने एंट्री मारी है।
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- फोटो : AmarUjala
माना जाता रहा है कि बाघ अधिकतम तीन हजार फुट से अधिक ऊंचाई पर नहीं रहते। वहीं अब इससे यह भी तय हो गया है कि उत्तराखंड में बाघों की संख्या मौजूदा आंकड़े से कहीं अधिक है। यही वजह है कि वन विभाग भागों की नए सिरे से गिनती करने जा रहा है।
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ice leopard
पिथौरागढ़ जिले के समुद्र तल से 14 हजार फुट ऊंचाई वाले हिमालयी जंगलों में वन विभाग ने हिम तेंदुओं की जानकारी जुटाने के लिए कैमरे लगाए थे, लेकिन जब तस्वीर सामने आई तो विभागीय अफसर हैरत में पड़ गए।
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कैमरा ट्रैप में युवा बाघ बेखौफ विचरण करता नजर आया। इससे पहले इतनी ऊंचाई पर बाघों के रहने की किसी ने कल्पना नहीं की थी। इस फुटेज के सामने आने के बाद विभाग आसपास के क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगवा रहा है।
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उधर, इस मामले ने वन्य जीव विज्ञानियों के लिए शोध के नए रास्ते खोल दिए हैं। माना जा रहा है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रहे तापमान के कारण बाघों का मिजाज बदल रहा है।
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विज्ञानियों का कहना है कि ‘सरवाइवल’ की वजह से बाघों ने इतनी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने के लिए अपने आप को ‘एडजस्ट’ कर लिया है। इसके पहले जलवायु परिवर्तन के कारण भालू के मिजाज और दिनचर्या बदलने की पुष्टि हो चुकी है।
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‘उत्तराखंड में 13-14 हजार फीट की ऊंचाई पर बाघ मिलने का यह पहला मामला है। अमूमन बाघ तीन-चार हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर नहीं जाते। इस मामले को देखने के बाद और भी स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगवाए जा रहे हैं।
-दिग्विजय सिंह खाती, प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) उत्तराखंड
जंगलों में और भी हैं बाघ...
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जंगलों में और भी हैं बाघ...
उत्तराखंड के जंगलों में और भी बाघ हैं जिनकी वन विभाग गिनती नहीं कर पाया है। वन विभाग के ताजा आंकड़े के मुताबिक प्रदेश के जंगलों में 340 बाघ हैं। लेकिन हाल में तराई क्षेत्र में 23 नए बाघों के होने की पुष्टि हुई है। विभागीय अफसरों का कहना है कि जंगलों में कम से कम 50 बाघ और हैं जिनकी गिनती नहीं हुई है। सीमित संसाधनों में जितनी गिनती हो पा रही है, कर रहे हैं।
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बाघों के लिए यूपी से अधिक सुरक्षित उत्तराखंड
बाघों के लिए यूपी से अधिक सुरक्षित उत्तराखंड के जंगल हैं। वन्य जीव आरक्षित क्षेत्रों के पास बफर जोन में बने गलियारों से यूपी के बाघ उत्तराखंड में सुरक्षित आवास ढूंढने आ जाते हैं। संख्या बढने से बाघों ने नेपाल सीमा पर नए गलियारे बना लिए हैं। डब्ल्युडब्ल्युएफ के शोध में इसकी पुष्टि हो चुकी है। वन विभाग ने बफर जोनों को जोड़कर नए टाइगर रिजर्व बनाने की योजना बनाई है।
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वन्य जीव तस्कर भी सक्रिय
प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ वन्यजीव तस्करों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने इस संबंध में अलर्ट भी जारी किया है। इसी महीने ब्यूरो ने वन्य मुख्यालय पर बैठक करके तस्करों को रोकने की कार्ययोजना बनाई थी।
कॉर्बेट पार्क में पांच बाघों के शिकार और रायवाला में बाघ की खाल बरामद होने के बाद संयुक्त टीम सक्रिय कर दी गई है। संयुक्त टीम में वन विभाग, पुलिस, आईटीबीपी और ईडी शामिल है।