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पहली बार, 14 हजार फीट पर हिम तेंदुए के इलाके में बाघों ने बसाया घर

Fri, 29 Jul 2016 06:55 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में समुद्र तल से 14 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी जीव विज्ञानियों को चौंका दिया है। हिमालय का यह क्षेत्र हिम तेंदुओं का एकांतवास माना जाता है। लेकिन अब वहां बाघों (टाइगर) ने एंट्री मारी है।
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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
माना जाता रहा है कि बाघ अधिकतम तीन हजार फुट से अधिक ऊंचाई पर नहीं रहते। वहीं अब इससे यह भी तय हो गया है कि उत्तराखंड में बाघों की संख्या मौजूदा आंकड़े से कहीं अधिक है। यही वजह है कि वन विभाग भागों की नए सिरे से गिनती करने जा रहा है।
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ice leopard
पिथौरागढ़ जिले के समुद्र तल से 14 हजार फुट ऊंचाई वाले हिमालयी जंगलों में वन विभाग ने हिम तेंदुओं की जानकारी जुटाने के लिए कैमरे लगाए थे, लेकिन जब तस्वीर सामने आई तो विभागीय अफसर हैरत में पड़ गए।

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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
कैमरा ट्रैप में युवा बाघ बेखौफ विचरण करता नजर आया। इससे पहले इतनी ऊंचाई पर बाघों के रहने की किसी ने कल्पना नहीं की थी। इस फुटेज के सामने आने के बाद विभाग आसपास के क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगवा रहा है।
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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
उधर, इस मामले ने वन्य जीव विज्ञानियों के लिए शोध के नए रास्ते खोल दिए हैं। माना जा रहा है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रहे तापमान के कारण बाघों का मिजाज बदल रहा है।
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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
विज्ञानियों का कहना है कि ‘सरवाइवल’ की वजह से बाघों ने इतनी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने के लिए अपने आप को ‘एडजस्ट’ कर लिया है। इसके पहले जलवायु परिवर्तन के कारण भालू के मिजाज और दिनचर्या बदलने की पुष्टि हो चुकी है। 
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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
‘उत्तराखंड में 13-14 हजार फीट की ऊंचाई पर बाघ मिलने का यह पहला मामला है। अमूमन बाघ तीन-चार हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर नहीं जाते। इस मामले को देखने के बाद और भी स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगवाए जा रहे हैं।
-दिग्विजय सिंह खाती, प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) उत्तराखंड

जंगलों में और भी हैं बाघ...

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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
जंगलों में और भी हैं बाघ...

उत्तराखंड के जंगलों में और भी बाघ हैं जिनकी वन विभाग गिनती नहीं कर पाया है। वन विभाग के ताजा आंकड़े के मुताबिक प्रदेश के जंगलों में 340 बाघ हैं। लेकिन हाल में तराई क्षेत्र में 23 नए बाघों के होने की पुष्टि हुई है। विभागीय अफसरों का कहना है कि जंगलों में कम से कम 50 बाघ और हैं जिनकी गिनती नहीं हुई है। सीमित संसाधनों में जितनी गिनती हो पा रही है, कर रहे हैं।

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tiger highest living - फोटो : AmarUjala
बाघों के लिए यूपी से अधिक सुरक्षित उत्तराखंड

बाघों के लिए यूपी से अधिक सुरक्षित उत्तराखंड के जंगल हैं। वन्य जीव आरक्षित क्षेत्रों के पास बफर जोन में बने गलियारों से यूपी के बाघ उत्तराखंड में सुरक्षित आवास ढूंढने आ जाते हैं। संख्या बढने से बाघों ने नेपाल सीमा पर नए गलियारे बना लिए हैं। डब्ल्युडब्ल्युएफ के शोध में इसकी पुष्टि हो चुकी है। वन विभाग ने बफर जोनों को जोड़कर नए टाइगर रिजर्व बनाने की योजना बनाई है।

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tiger
वन्य जीव तस्कर भी सक्रिय 

प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ वन्यजीव तस्करों की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने इस संबंध में अलर्ट भी जारी किया है। इसी महीने ब्यूरो ने वन्य मुख्यालय पर बैठक करके तस्करों को रोकने की कार्ययोजना बनाई थी।
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tiger - फोटो : अमर उजाला
कॉर्बेट पार्क में पांच बाघों के शिकार और रायवाला में बाघ की खाल बरामद होने के बाद संयुक्त टीम सक्रिय कर दी गई है। संयुक्त टीम में वन विभाग, पुलिस, आईटीबीपी और ईडी शामिल है।
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