गुफाओं की घाटी के नाम से प्रसिद्ध गंगोलीहाट में हाल ही में तीन नई गुफाएं मिली हैं। प्रशासन ने अभी तक इनके संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई है, लेकिन ग्रामीणों ने पर्यटन के मद्देनजर इन गुफाओं को गुमकोटेश्वर मुनखोला, सिंणकुटेश्वर और मेलचुरेश्वर का नाम तक दे डाला है।
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पाताल भ्ाुवनेश्वर गुफा
पूर्व में मिली गुफाओं में पाताल भुवनेश्वर सबसे अधिक बड़ी गुफा है। यह गुफा जमीन से पाताल लोक में 81 सीढ़ी नीचे जाने के बाद विशाल मैदान के रूप में दिखती है। इसके भीतर कई तरह के देवी-देवताओं की मूर्तियां विद्यमान हैं।
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longest cave in tiuni
- फोटो : AmarUjala
मणकेश्वर, शैलेश्वर, भोलेश्वर, चमडुंगरा, कर्तेश्वर, कोटेश्वर, दाणेश्वर की गुफाएं प्रकाश में आ चुकी हैं। दाणेश्वर की गुफा आठ मंजिली है। हाल में तीन गुफाएं मिली हैं, जिन्हें लोगों ने मेलचुरेश्वर तबला महादेव, सिंण कुटेश्वर, गुमकोटेश्वर नाम दिया है।
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longest cave in tiuni
- फोटो : AmarUjala
उनका कहना है कि गुमकोटेश्वर मुनखोला 12 मई, सिंणकुटेश्वर अप्रैल और मेलचुरेश्वर 17 मई को मिली हैं। गुफा की खोज करने वाले युवक शंकर सिंह बोरा ने बताया कि गुमकोटेश्वर की गुफा में जाने वाला वापस नहीं आ पाता है, जिस कारण इसे गुमकोटेश्वर नाम दिया गया है।
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सुरंग का एक दृश्य
- फोटो : amar ujala
उनका कहना है कि तबला महादेव मेलचुरेश्वर गुफा के भीतर प्रवेश करने पर इसकी दीवारों को बजाने से तबले के तरह की आवाज आती है। इसी वजह से इसे तबला महादेव गुफा नाम दिया गया है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मिलकर इन गुफाओं से पर्यटकों को रूबरू कराने की मांग की है।
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गुफा
- फोटो : amar ujala
अब तक ये गुफाएं मिलीं
पाताल भुवनेश्वर यह सैकड़ों वर्ष पुरानी है। बाद में मिली गुफाओं में कोटेश्वर करीब सौ साल, भोलेश्वर 20 साल, चमडुंगरा 25 साल, मणकेश्वर 50 साल, शैलेश्वर 30 साल पुरानी हैं।
यहां प्राकृतिक गुफाएं मिलने की जानकारी मिलती रहती है। इन्हें संरक्षित करने की कोई योजना नहीं है। प्रशासन अगर नई मिलीं गुफाओं के निरीक्षण के लिए कहेगा तो इनके संरक्षण की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।
- डॉ. चंद्र सिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी