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इस बार जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए, वर्षों बाद आया ऐसा संयोग

Sun, 13 Aug 2017 05:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लक्सर
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जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए
जन्माष्टमी के लिए शहर से देहात तक बाजार कान्हा के रंग में रंगने लगा है। स्कूलों में कार्यक्रमों की धूम हैं वहीं घरों में भी लड्डू गोपाल का इंतजार है। खास बात यह है कि इस बार की जन्माष्टमी अन्य सालों से पूरी तरह अलग होगी।
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happy janmashtami
इस वर्ष संयोग योग और नक्षत्र वैसे नहीं हैं, जैसे कृष्ण के जन्म के समय थे। 30 साल बाद फिर 15 अगस्त को जन्माष्टमी पड़ रही है, हालांकि गृहस्थ के लिए (स्मार्त) जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाई जाएगी, जबकि साधु संन्यासी (वैष्णव) 15 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।
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जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि अष्टमी की बेला में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, लेकिन इस बार दोनों ही योग नहीं पड़ रहे हैं। रोहिणी नक्षत्र 16 अगस्त को सुबह 2.32 बजे से होगा। इस बार 14 अगस्त की शाम 7 बजकर 48 मिनट पर अष्टमी तिथि का प्रवेश है जो मंगलवार शाम 5 बजकर 42 मिनट तक रहेगी।

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ऐसे में अधिकतर लोग 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे। वैष्णवजन सूर्योदय तिथि अष्टमी वाले दिन यानी 15 अगस्त को कृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। खास बात यह है कि 15 अगस्त की मध्यरात्रि में कृष्ण जन्म के समय न अष्टमी तिथि होगी और न रोहिणी नक्षत्र। 
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ज्योतिषाचार्य संदीप भारद्वाज कहते हैं कि इस साल जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे संयोग सदियों में कुछ बार आते हैं। इससे पहले वर्ष 1865 में राहु और शनि का ऐसा योग बना था। कृष्णजन्मोत्सव के साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह से रात 2.30 बजे तक रहेगा। यह योग श्रेष्ठता लेकर आएगा। चंद्रमा भी वृष राशि में, केंद्र में बुध व त्रिकोण में बृहस्पति रहेगा, जो आमजन व व्यापारी के लिए मिश्रित फलदायी रहेगा। इससे पहले वर्ष 2014 में भी रोहिणी के बजाय कृतिका नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाई थी। 
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ऐसे खुश होंगे कान्हा 
भगवान को पीले पुष्प अर्पित करें तो आर्थिक स्थिति सुधरेगी। दक्षिणा वर्णी शंख में जल भरकर श्रीकृष्ण का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होंगी। श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाने से मान सम्मान में वृद्धि होगी। गरीबों व असहायों को फलाहार कराने से रोगों का नाश होगा। इसके साथ ही इस दिन श्रीकृष्ण आराधना का विशेष महत्व होता है। 
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जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए
क्यों आती है ऐसी स्थिति  
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक सौरवर्ष का मान 365 दिन 15 घड़ी 22 पल और 57 विपल हैं। चंद्र वर्ष 354 दिन 22 घड़ी 1 पल और 23 विपल का होता है। दोनों वर्षमानों में प्रतिवर्ष 10 दिन 53 घड़ी 21 पल का अंतर पड़ता है। अंतर में समानता लाने के लिए हर तीसरे वर्ष चंद्रवर्ष 12 मासों के स्थान पर 13 मास का हो जाता है। इसे अधिमास या मलमास कहा जाता है। सौर और चंद्र मास में अंतर होने से ही नक्षत्र कुछ दिन आगे पीछे हो जाते हैं। 
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