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सफर पर जा रहे हैं तो पढ़िए इस खूनी हाईवे की कहानी, जिसने निगली न जाने कितनी जिंदगियां

Tue, 20 Feb 2018 06:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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accident
हरिद्वार-दिल्ली हाईवे पर सफर करना अपनी जान जोखिम में डालने सरीखा है। सात साल से चल रहा हाईवे चौड़ीकरण का काम खूनी बन गया। चौड़ीकरण के काम के चलते बने डेंजर जोन के कारण अभी तक सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं।
 
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delhi haridwar highway - फोटो : amar ujala
शनिवार की देर रात कोर कालेज के पास घटी दुर्घटना एक बार फिर हाईवे के निर्माण को लेकर ध्यान खींचा है। दरअसल, जहां दुर्घटना घटी है वहां पहुंचने पर यह पता ही नहीं चल पाता है कि पुल पर आवाजाही बंद है। न कोई साइन बोर्ड है न ही कोई डायवर्जन बोर्ड लगा है। यही नहीं कोई पैरापिट का निर्माण भी नहीं किया गया है। दुर्घटनास्थल को देखकर साफ हो जाता है कि पूरी तरह से लापरवाही बरती गई है। यदि वहां कोई साइन बोर्ड लगा होता तो संभवत दुर्घटना न होती। केवल रतमऊ नदी का पुल ही डेंजर प्वाइंट नहीं है, बल्कि जिले भर में ऐसे दो दर्जन से अधिक डेंजर प्वाइंट है।

 
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dehradun haridwar highway - फोटो : amar ujala
इन सभी डेंजर प्वाइंट पर पूर्व में हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की मौत हो चुकी है। शासन और प्रशासन केवल हाईवे के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरे होने के दावे तक ही सिमटा हुआ है, लेकिन सिस्टम की सुस्ती की कीमत आमजन को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। हरिद्वार दिल्ली हाईवे रोजाना खून से लाल हो रहा है। 

 
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deepak rawat
डीएम का दावा भी हवा 
डीएम दीपक रावत ने हाईवे पर बनने वाले फ्लाई ओवरों का कार्य 31 जनवरी तक पूरा होने का दावा किया था, लेकिन उनका दावा हवा हवाई था। दिलचस्प बात ये है कि एक भी फ्लाईओवर का कार्य पूरा नहीं हो सका। कुछ फ्लाईओवर का तो कार्य अभी शुरू ही नहीं हो सका है। ऐसे में जिलाधिकारी के दावे की पोल फोरलेन बना रही कंपनी ही खोल रही है। हाईवे की हालत ये है कि पता ही नहीं चलता है कि जाना कहां है। कहां से आना है और कहां से जाना है, ये समझ ही नहीं आता है। बड़े ही सोच समझ कर वाहन चलाना पड़ रहा है, वरना हादसा होना तय ही है। 
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