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बिना सुविधाओं के कैसे कह दें इसे प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल, अव्यवस्थाएं इतनी कि गिनती भूल जाओगे

Fri, 26 May 2017 02:43 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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doon medical college - फोटो : amarujala
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने उत्तराखंड ही नहीं, पड़ोसी राज्य हिमाचल और उत्तर प्रदेश के मरीज भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। साथ ही पहाड़ के अस्पतालों से रेफर होकर भी काफी मरीज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन इनकी तुलना में अस्पताल की व्यवस्थाएं और सुविधाएं बेहद कम पड़ रही हैं। चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना या इमरजेंसी की स्थिति में यह उपचार का सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अलावा डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से निपटने के लिए आइसोलेशन वार्ड भी यहीं बनाया जाता है। लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। पेश है आंखों देखा हाल...
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doon medical college - फोटो : amarujala
अस्पताल में सभी वार्ड और इमरजेंसी में बेड फुल हैं। महिला वार्ड में कई बेड पर दो-दो महिलाओं को लिटाकर उपचार किया जा रहा है। वहीं, सर्जिकल, ईएनटी, ऑर्थो वार्डों में भी सभी बेड फुल हैं। ऑपरेशन की आवश्यकता वाले मरीजों को बेड खाली होने के बाद आने की सलाह दी जा रही है।  अस्पताल की इमरजेंसी में पांव रखने की भी जगह नहीं है। इमरजेंसी में सभी बेड फुल हैं। इसके चलते मरीजों का स्ट्रेचर पर लिटाकर और कुर्सी पर बैठाकर उपचार किया जा रहा है। कई मरीज इमरजेंसी में जगह नहीं मिलने के चलते पीछे गैलरी में जमीन पर लेटकर उपचार करवा रहे हैं। 
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doon medical college - फोटो : amarujala
अस्पताल में बिलिंग काउंटर कम होने से भी मरीजों को परेशानी हो रही है। अस्पताल में रोजाना दो से ढाई हजार की ओपीडी होती है। ऐसे में बिलिंग और रजिस्ट्रेशन के लिए लोगों को लंबी लाइन लगानी पड़ती है। बिलिंग काउंटर पर मरीजों और तिमारदारों को काफी देर खड़ा रहना पड़ता है। वहीं, भीड़भाड़ के चलते अक्सर मरीजों में धक्का-मुक्की और मारपीट भी होती है।  मरीजों को दवा लेने के लिए तेज धूप में लाइन लगानी पड़ रही है। दरअसल, दवा काउंटर के बाहर काफी समय पहले शेड लगा दिया गया था। लेकिन कुछ दिन पहले मरम्मत के चलते शेड हटा दिया गया। अब शेड न होने से लोग दवा के लिए धूप में खड़े होने को मजबूर हैं। वहीं, बारिश होने पर भी दिक्कत होती है। 

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doon medical college - फोटो : amarujala
महिला अस्पताल में भी मरीजों की संख्या के हिसाब से सुविधाएं कम पड़ रही हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, बिलिंग और ब्लड टेस्ट आदि के लिए भी उन्हें लंबे समय तक लाइन में लगना पड़ता है। इसको लेकर कई बार गर्भवतियों और उनके परिजनों का अस्पताल कर्मियों से विवाद भी होता है। 
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doon medical college - फोटो : amarujala
चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा का कहना है कि अस्पताल में सभी तरह की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। लेकिन मरीजों का दबाव अधिक होने के कारण कुछ दिक्कतें हो रही हैं। अतिरिक्त बेड लगाने के बावजूद जगह नहीं है। नई बिल्डिंग में अस्पताल शिफ्ट होने पर अतिरिक्त जगह बन सकेगी, जिससे मरीजों को लाभ होगा।
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