फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Teachers Day: बदला नज़ारा.. चामी में घर-घर फैला शिक्षा का उजियारा, टीनेजर्स क्लब की पढ़िए ये अनोखी कहानी

Thu, 05 Sep 2024 03:46 PM IST
रेनू सकलानी अलका त्यागी, अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
विज्ञापन
1 of 5
पौड़ी जिले के चामी गांव - फोटो : अमर उजाला
दीप जलाओ शिक्षा का, घर-घर फैले उजियारा, अज्ञान खत्म हो हर कोने से, ऐसा हो पूर्ण प्रयास हमारा... पौड़ी जिले के चामी गांव में हर ओर ये पंक्तियां चरितार्थ होती दिखती हैं। यहां का हर बच्चा आज बिना आर्थिक तंगी के न सिर्फ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर रहा है बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत हो रहा है।

चामी गांव की तस्वीर बदली है चामी टीनेजर्स क्लब ने। अपने नाते-रिश्तेदार और दोस्तों की मदद से क्लब चलाने वाले अरुण कुकसाल गांव के बच्चों को शिक्षित करने के लिए न सिर्फ आर्थिक मदद कर रहे हैं, बल्कि खुद भी उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं। अमर उजाला को उन्होंने बताया कि क्लब वर्तमान में गांव के करीब 32 बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठा रहा है। जबकि अभी तक 50 से ज्यादा बच्चों की मदद कर चुका है।

गांव की महिलाएं ही पढ़ा रही
उनके क्लब के साथ अभी तक 50 से ज्यादा युवा जुड़ चुके हैं, जिनमें उनके दोस्त-रिश्तेदार और साथ काम कर चुके अधिकारी भी हैं। संयुक्त प्रयासों से चामी गांव में बच्चों के लिए सीटीसी लाइब्रेरी, कंप्यूटर प्रशिक्षण और मिलन केंद्र का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। वहीं, क्लब की ओर से बच्चों के लिए ट्यूशन की भी व्यवस्था की गई है। गांव की महिलाएं ही पढ़ा रही हैं। दोपहर 3:30 से 5:30 तक क्लास चलाई जाती है। इसके बाद, आधा घंटा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम व ग्रुप डांस कराया जाता है।

गांव के विभिन्न विद्यालयों में इंटरमीडिएट तक की शिक्षा ग्रहण कर रहे सभी बच्चों की फीस, कापी, किताब और ड्रेस की व्यवस्था आडिमिया संस्था के माध्यम से करवाई जा रही है। इसके लिए संस्था उनके या अभिभावकों के बैंक खातों में धनराशि उपलब्ध करवाती है। साथ ही आकाशवाणी के माध्यम से बच्चों की वार्ता का प्रसारण, उनके लिए समर कैंप, योगा शिविर, रंगमंच, अभिनय कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
विज्ञापन

2 of 5
पौड़ी जिले के चामी गांव - फोटो : अमर उजाला
ऐसे की क्लब की शुरुआत
विभिन्न सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके अरुण ने बताया कि करीब 32 साल नौकरी करने के बाद 2016 में उन्होंने रिटायर्मेंट ले लिया। वह गांव गए तो देखा कि वहां लोग आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकें। उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस समस्या को दूर करने की ठानी। एक जनवरी वर्ष 2019 में उन्होंने गांव में ही ग्राम सभा के भवन में क्लब की शुरुआत की। उनका क्लब चामी के ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों के बच्चों की भी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाता है। भविष्य में वे बच्चों की हायर एजुकेशन में भी मदद की योजना तैयार रहे हैं।

 
विज्ञापन

3 of 5
चामी गांव के बच्चे - फोटो : अमर उजाला
ये कर रहे मदद
क्लब को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में परिवारजनों, मित्रों के साथ-साथ दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, आडिमिया संस्था, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, सुंदर सिंह चौहान वृद्ध आश्रम, अरविन्द अध्ययन केंद्र, पराग बुक टीम और टाटा ट्रस्ट समेत कई संस्थाएं सहयोग दे रही हैं।

ये मिल रहीं सुविधाएं
छात्रों के लिए मिलन केंद्र में कुर्सी-मेज के अलावा कंप्यूटर, डिसप्ले बोर्ड, बुक शैल्फ में एक हजार से अधिक पुस्तकें व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। इसके अलावा कक्षा-6 से 12 तक के बच्चों को पढ़ाई के लिए टेबलेट दिए गए हैं। वहीं, हाईस्कूल उर्तीण करने वाले बच्चों को लैपटॉप दिए जाने की भी योजना है।

4 of 5
चामी गांव के बच्चे - फोटो : अमर उजाला
जातीय भेदभाव कर रहे दूर
क्लब में बच्चों को जातीय भेदभाव को दूर करने की भी शिक्षा दी जा रही है। इसके लिए उन्होंने अनोखी पहल की है। उनके क्लब में बच्चों के नाम उनकी जाति के बिना रजिस्टर्ड हैं।

महिलाओं को भी दे रहे शिक्षा
अरुण ने बताया कि क्लब के प्रशिक्षण केंद्र में केवल बच्चे ही नहीं बल्कि गांव की महिलाएं भी निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। जिन्हें पढ़ाने लिए अनुभवी शिक्षक रखा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बच्चे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रवासी उत्तराखंडियों से की अपील
अरुण ने प्रवासी उत्तराखंडियों से अपील की है कि वह भी अपने परिचितों-रिश्तेदारों को जोड़कर ऐसे क्लब बनाएं और अपने गांवों के बच्चों की शिक्षा ग्रहण करने में मदद करें।

ये भी पढ़ें...Teachers' Day: बचपन में बड़े नटखट थे मंत्री जी...शिक्षकों की जुबानी उत्तराखंड सरकार के इन मंत्रियों की कहानी

सरकार से उम्मीद
अरुण का कहना है कि उनका ग्राम सभा का भवन जर्जर हालत में है। इसे में वो क्लब की गतिविधियों का संचालन करते हैं। सरकार अगर इसे ठीक करा दे तो काफी राहत मिल जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें