टपकेश्वर सेवादल की ओर से शनिवार को शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। इसमें 11 घोड़े, जबलपुर का बैंड और माता काली की तीन झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। टपकेश्वर के चारों स्वरूपों के दर्शनों के लिए जगह-जगह श्रद्धालु उमड़ पड़े। तस्वीरें...
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नंदी घोड़ी पर बैठे शिवजी की झांकी के दर्शनों को श्रद्धालु उमड़ रहे थे। इसके साथ ही जबलपुर का बैंड, दस सफेद और एक काला घोड़ा भी अलग ही दिखाई दे रहा था। काली के तीनों स्वरूप, तिरूपति बाला जी, आगरा के मनकामेश्वर मंदिर के झांकी भी विशेष थी। मथुरा-वृंदावन के साथ ही नजीबाबाद के कलाकार भी अलग-अलग झांकियों में शामिल थे।
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इस दौरान बाबा के सभी देवेश्वर, दूधेश्वर, तपेश्वर और टपकेश्वर स्वरूप के दर्शन भी श्रद्धालुओं ने किए। यात्रा शिवाजी धर्मशाला से सहारनपुर चौक, धामावाला चौक, पलटन बाजार, चकराता रोड, बिंदाल पुल, कैंट कार्यालय के सामने से, डाकरा बाजार होते हुए टपकेश्वर मंदिर पहुंच संपन्न हुई। महंत कृष्णा गिरि ने बताया कि टपकेश्वर मंदिर में दिनभर भंडारा चलता रहा।
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यात्रा के वापस पहुंचने पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई। यात्रा में महंत 108 माया गिरि, महंत कृष्णा गिरि, दिगंबर भरत गिरि, अनुज गुप्ता, गोपाल गुप्ता, मनमोहन जायसवाल, महेश खंडेलवाल, योगेश, रजनीश यादव, आशीष गुप्ता, सचिन जैन, विनय गुप्ता आदि ने सहयोग किया।
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एक ओर हर कोई शिव भगवान, देवी आदि स्वरूपों में सजा था तो वहीं मेरठ से आए नीरज लंगूर बनकर उछल-कूद मचा रहे थे। नीरज का अभिनय देख हर कोई उनकी तारीफ कर रहा था। नीरज ने बताया कि वह आठ सालों से लंगूर बन रहे हैं। इस किरदार में जहां उछल-कूद मचाने को मिलती हैं।
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इस दौरान पशुपति नाथ, महिषासुर मर्दनी, डांडिया ग्रुप, खाटु श्याम जी, सालासर बाला जी, गोकर्ण नाथ बालाजी, कालरात्रि, जबलपुर बैंड, पंचमुखी हनुमान जी, मनकामेश्वर मंदिर, तिरूपति बालाजी, कैलाश मानसरोवर आदि।
शोभायात्रा में शामिल की जाने वाली राजा दक्ष प्रजापति की बकरे की मुंह वाली झांकी हटा ली गई। इस झांकी का नंबर आठ था। सेवा दल से जुडे़ मनमोहन जायसवाल ने बताया कि प्रजापति समाज के विरोध के बाद इस झांकी को शोभायात्रा से हटा लिया गया।