125 साल पहले जिसने स्वामी विवेकानंद को ज्ञान दिया था, वह फिर से जीवित हो उठा है। बता दें कि 1890 मे स्वामी विवेकानंद जब हिमालय यात्रा पर निकले अल्मोड़ा में तो तीन नदियों के संगम काकड़ीघाट पर उन्हें खगोलीय तरंगों की अनुभूति हुई थी। जिसके बाद उन्होंने घाट पर स्नान किया और पास ही विशाल पीपल वृक्ष के नीचे ध्यान लगाकर बैठ गए।