परमार्थ आश्रम में सुषमा
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मैंदोला बताते हैं कि कुछ वर्षों बाद जब स्कूल उच्चीकृत हो गया तो पुन: स्वराज को यहां आने का न्योता दिया गया, जिसके बाद उन्होंने जल्द आने की बात कही। लेकिन अपनी व्यवस्ताओं के चलते वो यहां नहीं आ पाईं। अब नवंबर में स्कूल के स्थापना दिवस होने वाले समारोह के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया था, उन्होंने न्योता स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन इससे पहले ही उनके निधन की खबर आ गई।