तापमान बढ़ते ही हिमालयी क्षेत्र के जंगल गरमाने लगे हैं। केंद्र ने जंगल की आग को आपदा की तरह गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को सेंटर फॉर एक्सीलेंस घोषित कर दिया है।
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- फोटो : Amar Ujala
हिमालयी जंगलों को आग से बचाने के लिए रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं। एफआरआई फायर ब्रिगेड कर्मियों, वनाधिकारियों और संबंधित विभागों को जंगल की आग पर काबू करने के लिए प्रशिक्षण देगा।
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ऐसे वक्त में जब वन संपदा और इको सिस्टम सर्विसेस के संरक्षण की विश्व स्तर पर कवायद चल रही है वनाग्नि एक गंभीर समस्या हो गई है। जंगल में आग लगने पर बेशकीमती संपदा नष्ट हो जाती है।
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इस पर केंद्र सरकार ने पहली बार इतनी गंभीरता दिखाई है। केंद्र ने कहा है कि जंगल की आग को आपातकाल की तरह लिया जाए। आग की रोकथाम के लिए कर्मचारियों को किट भी वितरित की जाएगी। अगले महीने से फायरकर्मियों का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा।
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महानिदेशक वन एवं पर्यावरण डा. एसएस नेगी का कहना है कि एफआरआई को सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाया गया है। इसमें आग की रोकथाम के लिए मजबूत रणनीति बनाई जाएगी।
विभिन्न बिंदुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही विभागों में समन्वय बैठाया जाएगा। सबसे अहम बात है कि आग को लगने ही न दिया जाए। रोकथाम के उपाय पहले से कर लिए जाने चाहिए।