ई-लर्निंग प्रोग्राम के तहत यहां सरकारी स्कूल के बच्चों को मजे-मजे में पढ़ाया तो बच्चों के समझ में भी आ गया। सरकार इस योजना को प्रभावी करने का विचार कर रही है।
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नियोजन विभाग की पहल पर जिला प्रशासन के सहयोग से प्रदेश के कुछ चुनिंदा सरकारी स्कूलों में चलाए गए ई-लर्निंग प्रोग्राम को शिक्षा विभाग में बेस्ट प्रैक्टिस के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
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ऐसा होने पर पठन-पाठन के इस नए तरीके को प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू किया जा सकता है, बल्कि बेसिक शिक्षा में पिछड़े राज्य भी इससे प्रेरणा ले सकते हैं।
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पिछले तीन शैक्षणिक वर्ष के दौरान पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर संचालित इस कार्यक्रम के नतीजे उत्साहित करने वाले हैं। कार्यक्रम के संचालन के बाद स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ी है।
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एनुअल स्टेट्स ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) में प्रदेश के स्कूली बच्चों का क्लास के हिसाब से स्तर न होने की जानकारी आने के बाद ‘प्रोजेक्ट फॉर एजुकेशन हिल’ के नाम से प्रोग्राम शुरू किया गया।
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इसमें शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े आधा दर्जन एनजीओ के सहयोग से उन स्कूलों में कार्यक्रम चलाया गया, जिनके बारे में ‘असर’ की रिपोर्ट में बच्चों का खराब प्रदर्शन आंका गया था। चयनित स्कूलों में पढ़ाई के पारंपरिक तौर-तरीकों से जुदा बच्चों को व्यावहारिक और खेल गतिविधियों के माध्यम से अक्षर, अंक ज्ञान, गणित, विज्ञान, भाषा, लेखन सिखाया गया।
पठन-पाठन में कंप्यूटर तकनीक की मदद ली गई। प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों का बौद्धिक विकास पर जोर दिया गया। जिन स्कूलों में प्रोजेक्ट खत्म हो गया, वहां उपलब्ध संसाधनों के जरिये कार्यक्रम जारी है।