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सोमवती अमावस्या: कड़ाके की ठंड में लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, तस्वीरें

Mon, 18 Dec 2017 10:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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ganga snan
कड़ाके की ठंड के बीच सोमवती अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। तस्वीरें...
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देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने सोमवार को गंगा स्नान कर दान पुण्य किए। कड़ाके की ठंड के बावजूद शाम तक लोगों की भीड़ जुटी रही। महिलाओं ने पीपल के पेड़ों पर सूत के धागे लपेट कर पुण्य कर्म किए। पौष मास में पड़ी सोमवती अमावस्या का स्नान करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु तड़के से पहुंचे लगे।
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रविवार सायंकाल तक स्नानार्थियों की भीड़ कम नजर आ रही थी, लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते भीड़ बढ़ती गई। हरकी पैड़ी सहित गंगा के तमाम घाटों पर गंगा स्नान तड़के चार बजे से प्रारंभ हो गया था। सूर्योदय के बाद स्नान ने तेजी पकड़ ली। अपर रोड, बड़ा बाजार और सुभाष घाट क्षेत्र में स्नानार्थियों का तांता लगा रहा।

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श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। सूर्योदय के समय हरकी पैड़ी पर महारुद्राभिषेक के साथ ग्यारह विद्वान पंडितों ने मां गंगा का वंदन किया, चूंकि कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, अत: श्रद्धालु डुबकी लगाते ही बाहर निकल रहे थे। पंजाब, जम्मू कश्मीर के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रही। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली से भी काफी श्रद्धालु पहुंचे। सभी ट्रेनें और बसें श्रद्धालुओं से खचाखच भरी रही। निजी वाहनों से भी स्नानार्थी पहुंचे।
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 सोमवती अमावस्या वास्तव में अक्षय अमावस्या कही जाती है। माना जाता है कि इस दिन किया गया पुण्य कर्म कभी नष्ट नहीं होता। अनेक धर्मस्थलों पर कथा, प्रवचन आदि किए गए। गंगा घाटों पर लोगों ने भागवत स्मरण किया और मालाएं जपी। दोपहर के समय कईं जगह भोज का आयोजन हुआ। पौष मास में देव कर्म नहीं होते अत: शैया दान और उद्यापन नहीं हो पाए वैशाख में बैसाखी के साथ पड़ रही सोमवती पर भारी भीड़ उमड़ेगी।
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पौष के महीने को खर मास भी कहा जाता है। इस महीने में विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद रहते हैं। इसी प्रकार पर्व के समय भी यज्ञ, हवन, अनुष्ठान आदि नहीं होते। इस महीने के प्रत्येक दिन पितृ शांति के लिए कर्मकांड कराया जा सकता है। शुक्ल पक्ष में भी पितृ कर्म होते रहते हैं। इस महीने में यद्यपि पूर्ण संक्रांति होती है, इसके बावजूद शुभ कर्म अधिक नहीं किए जाते। यही वजह थी कि जो सोमवती अमावस्या सबसे बड़ा स्नान बनती है, वह इस बार उतरा बड़ा स्नान नहीं बनी।
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