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Sidhbali Dham: गुरु गोरखनाथ से मिली थी सिद्धबली को सिद्धि, 2028 तक भंडारों की बुकिंग फुल, पढ़ें रोचक बातें

Fri, 09 Dec 2022 08:41 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
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सिद्धबली महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के कोटद्वार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री सिद्धबली धाम में सालाना महोत्सव शुरू हो गया है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाभिषेक में शामिल होकर श्री सिद्धबली से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। तो चलिए आपको धाम के बारे में कुछ रोचक बाते बताते हैं....

Kotdwar: पिंडी महाभिषेक के साथ शुरू हुआ श्री सिद्धबली महोत्सव, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, तस्वीरें

मान्यताओं के अनुसार सिद्धबली कत्युर वंश के राजा के पुत्र थे जिन्हें गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से सिद्धि प्राप्त हुई थी। श्री सिद्धबली मंदिर ने अपनी पुस्तक में भी इसका उल्लेख किया है जिसमें सिद्धबाबा के पहले का नाम हरपाल बताया गया है।
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सिद्धबली महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
इस युवक के बलवान होने के कारण गुरु गोरखनाथ ने उसे सिद्धियां दिलाईं जिसके बाद उन्हें सिद्धबली अर्थात सिद्धबाबा के नाम से जाना गया। यह भी मान्यता है कि सिद्धबाबा ने पुराने कोटद्वार स्थित सिद्धों के डांडा (वर्तमान सिद्धबली मंदिर वाली पहाड़ी) नामक पहाड़ी पर कई वर्षों तक तप किया था।
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सिद्धबली मंदिर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
जिस वक्त हरपाल सिद्धि प्राप्त करने के लिए घर से निकले थे उस समय वह सवा सेर आटा और कुछ गुड़ अपने साथ ले गए थे। उसने उसी समय आग में पकाकर उसका रोट बना दिया। तब ही से सिद्धबली में सवा सेर रोट का प्रसाद चढ़ता है। श्री सिद्धबली मंदिर समिति के अध्यक्ष जेपी ध्यानी के मुताबिक यह भी मान्यता है कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए इसी रास्ते हिमालय गए थे।

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सिद्धबली मंदिर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
श्री सिद्धबली कोटद्वार में मनोकामना पूरी होते ही भक्त भंडारा कर हनुमान जी को भोग लगाते हैं। श्रद्धालुओं पर बजरंग बली की नेमत इस कदर बरसती है कि भंडारा आयोजन के लिए भक्तों को सालों साल इंतजार करना पड़ता है।
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सिद्धबली मंदिर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
यहां रविवार के दिन भंडारा करने के लिए वर्ष 2028 तक की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। जबकि अन्य दिनों के भंडारे के लिए 2026 तक की बुकिंग एडवांस में हो चुकी है। भंडारा सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक चलता है।
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