badrinath
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बताते हैं कि आठवीं सदी में आदि गुरू शंकराचार्य ने ही भविष्य बदरी मंदिर की स्थापना की थी। भविष्य बदरी मंदिर के समीप ही एक पत्थर पर शंकराचार्य ने भविष्णवाणी भी लिखी है। जिस भाषा में भविष्यवाणी लिखी गई है, उसे आज तक कोई नहीं पड़ पाया है।