शरद पूर्णिमा विशेष
शरद पूर्णिमा वास्तव में शरद का समापन और हेमंत ऋतु का आगमन पर्व भी है। जन्म कुंडली में चंद्रमा क्षीण हों, महादशा-अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा चल रही हो या चंद्रमा छठवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो चन्द्र कि पूजा और मोती अथवा स्फटिक माला से ॐ सों सोमाय मंत्र का जाप करें। इससे आपको धनलाभ होगा। इस रात्रि में खीर अथवा चिवड़े के सेवन से जीवनदायनी ऊर्जा प्राप्त होती है। इन दोनों पदार्थों कोई भी दूध के साथ तैयार कर चंद्रमा के रौशनी में रखने चाहिए। जब एक प्रहर अथवा तीन घंटे बीत जाएं, तब वह खीर मानस रूप से महालक्ष्मी को अर्पित की जाती है। बाद में समूचे परिवार के साथ चंदनी में बैठकर इसे ग्रहण करते हैं। हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा के व्रत को कौमुदी व्रत कहा गया है।