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Lance Naik Chandrashekhar: उस दिन अचानक तय हुआ था चंद्रशेखर का नाम, पढ़ें- लांस नायक कुंवर सिंह नेगी की जुबानी

Wed, 17 Aug 2022 02:23 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी।
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शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का परिवार - फोटो : अमर उजाला
सियाचिन की चोटी की तरफ जाने वाली पेट्रोलिंग टीम में शहीद लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का नाम ही नहीं था। जाने से कुछ देर पहले हुए फेरबदल में लांस नायक को टीम में शामिल किया गया था। हल्द्वानी के हरिपुर नायक स्थित आदर्श कॉलोनी निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार कुंवर सिंह नेगी मूलरूप से रानीखेत के बगवाली पोखर के रहने वाले हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में सियाचिन की चोटी की तरफ जिस पेट्रोलिंग पार्टी को जाना था उसमें लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का नाम ही नहीं था। 
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शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला - फोटो : अमर उजाला
उस दौरान वह भी फौज में लांसनायक के पद पर वहीं तैनात थे और पेट्रोलिंग टीम में उन्हें जाना था। उसी दौरान वहां के स्टोरमैन किशन सिंह कन्याल की तबियत खराब होने की वजह से उन्हें प्रतापपुर भेज दिया गया था। बताया कि बेस तक पहुंचने वाले राशन और गोला-बारूद समेत अन्य सामान को हवाई मार्ग से ही बेस में ड्रॉप कर दिया जाता था। उसे एकत्र करके उसका लेखा-जोखा तैयार करने वाले की अचानक जरूरत पड़ी तो सैन्य अधिकारियों ने उन्हें पेट्रोलिंग पार्टी से हटाकर स्टोरमेन की जिम्मेदारी सौंप दी और उनकी जगह लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला को शामिल कर दिया गया। 

 
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शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला - फोटो : अमर उजाला
बताया कि जिस सुबह पेट्रोलिंग टीम रवाना हुई उसी रात हादसा हो गया और सभी जवान शहीद हो गए। बताया कि साल 2007 में वह सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए। अब इसे संयोग कहा जाए या फिर विधि का विधान, लेकिन वे आज भी सैन्य अधिकारियों के उस फैसले के बारे में अक्सर सोचते हैं। 

 

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शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का परिवार - फोटो : अमर उजाला
खुशमिजाज और बहादुर थे लांस नायक चंद्रशेखर
सेवानिवृत्त सूबेदार कुंवर सिंह नेगी और कैप्टन मदन सिंह राठौड़ ने बताया कि शहीद लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला बेहद खुशमिजाज स्वभाव के थे। पूरी यूनिट को परिवार मानकर चलने वाले शहीद लांस नायक सभी के चहेते थे। कभी कोई शिकायत नहीं, कभी किसी से कोई बुराई नहीं।

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शहीद लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला की पत्नी - फोटो : अमर उजाला
कैप्टन मदन सिंह बताते हैं कि सियाचिन की तरफ बढ़ने के बाद जहां एक तरफ कुछ लोगों की हिम्मत टूट रही थी तो वहीं लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला ने टीम के साथियों का हौंसला बढ़ाते हुए आगे बढ़ते रहने और देश की रक्षा के लिए तत्परता लाने को प्रोत्साहित किया।
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