कालिका माता समिति के परमाध्यक्ष बालयोगी सर्वदास जी महाराज शनिवार को ब्रह्मलीन हो गए। उन्हें शुक्रवार को पेट दर्द होने पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उनका ऑपरेशन भी किया गया, लेकिन शनिवार को इलाज के दौरान उन्होंने शरीर त्याग दिया। महाराज के देहावसान की खबर सुनते ही उनके अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मंदिर परिसर में रखा गया है। उनके अंतिम दर्शन करने के लिए मंदिर में लोगों का तांता लगा हुआ है।
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sevadas maharaj
रविवार को उन्हें हरिद्वार ले जाकर गंगा में जल समाधि दी जाएगी। बालयोगी सर्वदास महाराज के देहावसान पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, टिहरी सांसद माला राज लक्ष्मी शाह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, विधायक खजान दास, विधायक हरबंस कपूर, टपकेश्वर मंदिर के महंत मायागिरि, पूर्व विधायक राजकुमार, अशोक वर्मा सहित सैकड़ों लोगों ने कालिका मंदिर पहुंचकर शोक प्रकट किया।
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sevadas maharaj
शहर के मच्छी बाजार स्थित कालिका माता मंदिर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित 11 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा था। बताया गया है बृहस्पतिवार को उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसके बावजूद वे धार्मिक कार्यों में लगे रहे। शुक्रवार को जब कथा का समापन समारोह चल रहा था तो उन्हें पेट में तेज दर्द हुआ। बावजूद इसके उन्होंने मंगल आरती कर शालिगराम की पूजा व श्रृंगार आरती पूर्ण की। इस दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई। उनकी हालत को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने उनके तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। इसके बाद चिकित्सकों ने करीब ढाई घंटे तक उनका ऑपरेशन किया और वेंटीलेटर पर रख दिया।
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trivendra singh rawat
चिकित्सकों के अनुसार बाबा की आंत फट गई थी, जिससे उनके पेट में इंफेक्शन हो गया। शरीर में इंफेक्शन बढ़ने से उनका रक्तचाप गिरता चला गया। इसके बाद शनिवार सुबह करीब दस बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। देहावसान के बाद अनुयायी उनके पार्थिव शरीर को मंदिर परिसर ले गए, जहां उनके अंतिम दर्शन को लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान उमेश मनोचा, मुरली चांदना, सतीश कक्कड़, ओम प्रकाश चांदना, आनंद मुनियाल, अशोक मलिक, संजय चांदना, संजय आनंद, नंद कुमार आनंद, प्रतिक मेनी समेत अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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बद्रीनाथ से आए संत ने दिखाया रास्ता
बालयोगी सर्वदास जी महाराज का जन्म गंगा 22 जून को 1941 को दशहरा के दिन बन्नू में हुआ था। यह स्थान अब पाकिस्तान में है। उनके पिता तोताराम चांदना और माता सोहानी देवी थीं। महाराज का बचपन का नाम भूषण था। भारत के विभाजन के बाद से ही वह दून के लूनिया मोहल्ला में परिवार के साथ रहने लगे थे। वे बाल्यावस्था से ही गंगा स्नान व ठाकुर जी की पूजा में लीन रहते थे और गाय की पूजा करते थे। बाबा जब आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब बद्रीनाथ से आए एक संत ने उन्हें जीवन के रहस्यों का ज्ञान दिया। 11 वर्ष की आयु में उन्होंने अद्वैत प्रकाश जी से दीक्षा ली थी। बताया जाता है कि बाबा को सपने में माता ने दर्शन दिए थे, जिसमें बताया कि मच्छी बाजार नाले में मूर्ति दबी हुई है। इस पर बाबा ने जब खुदाई कराई तो वहां हनुमान जी की मूर्ति निकली थी। तभी से बाबा ने पढ़ाई छोड़ दी और धार्मिक कार्यों में लग गए।
ये थी बाबा की आखिरी इच्छा
कालिका माता मंदिर समिति के परमाध्यक्ष बालयोगी सर्वदास जी महाराज की आखिरी इच्छा थी कि उनके पार्थिव शरीर को जलाया न जाए। उनके शरीर को जल समाधि दी जाए। बाबा की इस इच्छा को पूरा करने के लिए उनके शरीर को हरिद्वार ले जाएगा, जहां उन्हें जलसमाधि दी जाएगी। शनिवार को सुबह साढ़े सात बजे बाबा की शव यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा चकराता रोड होते हुए घंटाघर, पलटन बाजार, धामावाला, दर्शनी गेट, प्रिंस चौक होते हुए हरिद्वार जाएगी। वहां बाबा के पार्थिव शरीर को गंगा में जल समाधि दी जाएगी।
ये थे बाबा के संकल्प
- कभी किसी को शिष्य नहीं बनाना।
- पैसे को हाथ नहीं लगाना।
- अपने नाम की कोई संपत्ति नहीं रखना।
- महिलाओं का उनके कक्ष में जाना वर्जित।