पुराणों में वर्णित सभ्यताओं की जननी कही जाने वाली सरस्वती नदी की हरियाणा के विलासपुर मुगलवाली में निशानदेही हो गई है। खेतों के नीचे बह रही जल धारा की जब खुदाई की गई तो रिवर बेड निकला है।
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scientists trace invincible legendary river saraswati
पानी के तत्वों और रिवर बेड के छोटे पत्थरों की जांच से यह भी तय हो गया है कि यह नदी निम्न हिमालय से निकली है। सर्वे ऑफ इंडिया के पुराने दस्तावेजों में भी इस स्थान पर सरस्वती नदी अंकित किया गया है।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
डेढ़-दो साल पहले पुरातत्व विभाग ने मुगलवाली में खेतों के बीच धंसाव में नदी होने की संभावना जाहिर की थी। यहां खुदाई भी शुरू कराई गई। बाद में हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड और वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने मिलकर यहां जांच शुरू की।
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saraswati river
- फोटो : AmarUjala
वाडिया के निदेशक डॉ. एके गुप्ता की अगुवाई में वरिष्ठ विज्ञानी नदी विशेषज्ञ डॉ. संतोष राय, ग्लेशियर विशेषज्ञ गंगोत्री इंचार्ज डॉ. समीर तिवारी और एकेएल अस्थाना के साथ मौके पर जाकर खुदाई कराई।
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पानी और रिवर बेड की विज्ञानियों ने की जांच
- फोटो : AmarUjala
यहां तीन फुट के नीचे 20 फुट मोटा रिवर बेड मिला और पानी ऊपर आ गया। विज्ञानियों ने पानी के पीएच, ऑक्सीजन आइसोटोप्स, इलेक्ट्रिकल कंडेक्टीविटी की जांच की तो इस नदी के निम्न हिमालय क्षेत्र से निकलने की पुष्टि हो गई।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
इसके साथ ही नदी से लिए गए सैंपल के आइसोटोप्स की दूसरी जांचें की जा रही हैं, जिससे नदी की उत्पत्ति के संबंध में और भी राज खुल जाएंगे। विज्ञानियों ने बताया कि नदी की वॉटर केमिस्ट्री गंगा से मिलती जुलती है। डॉ. तिवारी का कहना है कि सर्वे ऑफ इंडिया के वर्ष 1912-13 के मानचित्र में मुगलवाली के इसी स्थान पर सरस्वती नदी अंकित है।
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सरस्वती नदी
- फोटो : फाइल फोटो
पानी की जांच से यहां सरस्वती नदी होने के प्रमाण मिल गए हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के टोपोशीट के आधार पर यहां जांच की गई। नदी में मिले पत्थरों की जांच से भी प्रमाणित हो गया है कि ये शिवालिक-निम्न हिमालयी क्षेत्र के हैं। इसके अलावा और भी जांच की जा रही है।
- डॉ. एके गुप्ता, निदेशक, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
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सरस्वती नदी वैदिक काल की है। ऋग्वेद में भी इसका जिक्र है। प्राचीन काल की कई सभ्यताएं इसके किनारे विकसित हुई हैं। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि कलयुग में सरस्वती नदी जमीन के अंदर बहेगी। कालांतर में हिमालय क्षेत्र के सूखा काल में यह नदी विलुप्त हो गई थी। लूनी और घघ्घर नदी को भी सरस्वती से जोड़ने की कोशिश की गई।