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वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, अब भारत में भी बनाई जा सकेगी डायनासोर काल से जुड़ी ये चीज

Tue, 17 Apr 2018 05:34 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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डायनासोर - फोटो : File Photo
डायनासोर काल से जुड़ी इस चीज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की है। जिसके बारे में पढ़कर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।
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Ginkgo Biloba
उत्तराखंड वानिकी शोध शाखा रानीखेत के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च पेश की है। वैज्ञानिकों ने डायनासोर काल से जुड़े एक पौधे को लेकर एक महत्वपूर्ण काम किया है। वैज्ञानिकों ने करीब 270 मिलियन साल पुराने पौधे जिंको बाइलोवा की प्रजाति के क्लोन उगाने में कामयाबी हासिल की है।
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Ginkgo Biloba
एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक, डायनासोर काल से धरती पर पाए जाने वाले इस  पौधे में सर्वाधिक औषधीय गुण पाए जाते हैं। जिससे कई तरह की दवाईयां बनाई जा सकती है। ऐसे में इसकी क्लोनिंग कर इसका फायदा आज भी उठाया जा सकता है।

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रिसर्च - फोटो : demo pic
क्लोनिंग के जरिए वानिकी शोध शाखा की नर्सरी में पहली बार जिंको बायलोवा के 151 पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें अधिकांश की ऊंचाई दो मीटर तक हो चुकी है। वन संरक्षकों का कहना है कि, अल्मोड़ा के कटारमल पर्यावरण शोध संस्थान और कश्मीर से जिंको बायलोवा प्रजाति के कुछ जेनेटिक सैंपल लिये गए। विस्तृत अध्ययन के बाद रानीखेत स्थित कालीगाढ़ शोध नर्सरी में इनके क्लोन तैयार किए गए।
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research
बता दें कि, जिंको बायलोवा में नर और मादा पौधे अलग होते हैं। नर की पत्तियों के बीच कटाव कम गहरा होता है। ’  मादा पौधों पर फूल जल्द आते हैं, जबकि करीब चार माह बाद नर पौधे में फूल आता है। ’ जिंको वायलोवा को जिंदा जीवाश्म भी कहा जाता है। जिंकोगेशिया परिवार की यह एकमात्र जीवित बची वृक्ष प्रजाति है। चीन में इस पेड़ की अधिकतम उम्र एक हजार साल रिकॉर्ड हुई है।
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ग्लूकोमा - फोटो : फाइल फोटो
शोध में सामने आया है कि, जिंको बायलोवा अल्जाइमर्स, ग्लूकोमा, दमा, एलर्जी, नपुंसकता आदि रोगों में बेहद कारगर है। जिंको बायलोवा का प्रयोग चीन की पारंपरिक दवाओं में सदियों से होता रहा है। दुनिया भर में चीन से इसकी  पत्तियों का निर्यात किया जाता है। इसके बाद अब यह भारत में भी बनाई जा सकेगी।
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