150 वर्षों में पहली बार 31 जनवरी को पड़ रहे विशेष चंद्रग्रहण सुपर ब्लू ब्लड मून पर नैनीताल में नया इतिहास बनने जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें...
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देहरादून
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विश्व में पहली बार चांद के अध्ययन की नई तकनीक का यहां परीक्षण होगा जिससे बाद में अन्य ग्रहों के परीक्षण और अंतरिक्ष के नए रहस्यों को उजागर करने की राह खुलेगी। इस तकनीक के परीक्षण को जापान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज पहुंच चुके हैं।
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चांद
एरीज में मुख्यत: सूर्य संबंधी अध्ययन किया जाता है। सूर्यग्रहण के अवसरों पर यहां विशेष अध्ययन किए जाते रहे हैं लेकिन चंद्रग्रहण के अवसर पर यहां कोई अध्ययन नहीं किया गया। इस वर्ष पहली बार यहां से चंद्रग्रहण के विशेष प्रेक्षण के साथ ही विश्व में चांद के प्रकाश के अध्ययन की नई तकनीक का परीक्षण भी किया जाएगा जो जापान के वैज्ञानिकों ने विकसित की है।
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सुपर मून
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इस तकनीक के परीक्षण के लिए जापान के निशिहामा एस्ट्रोनॉमिकल वेधशाला के वैज्ञानिक प्रोफेसर आइतो के नेतृत्व में टीम यहां पहुंच चुकी है। एरीज के निदेशक डॉ. अनिल पांडे ने बताया कि जापान के अलावा दिल्ली विवि के प्रोफेसर एचपी सिंह की टीम भी यहां आई है। एरीज जापान के सहयोग से कार्य कर रहा है। इसी के चलते जापान के वैज्ञानिकों ने चांद के प्रकाश के अध्ययन की नई पोलेरीमीटर तकनीक के परीक्षण के लिए एरीज को चुना।
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SUPER BLUE BLOOD MOON
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यह परीक्षण एक ही समय पर जापान व नैनीताल में किया जाएगा। डॉ. पांडे ने बताया कि इसका उद्देश्य ग्रहण के दौरान विभिन्न लेटीट्यूडीनल एटमॉसफियर के सापेक्ष चांद के प्रकाश के अंतर को मापना है। उन्होंने बताया कि इस परीक्षण के सफल होने पर इस तकनीक से अन्य ग्रहों का भी अध्ययन किया जाएगा जो भविष्य में अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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चांदनी रात
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डॉ. पांडे ने बताया कि इसका परीक्षण एरीज के 1.3 मीटर के टेलीस्कोप से किया जाएगा। उन्होंने इस अध्ययन को विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एरीज के लिए भी यह बहुत बड़ी उपलब्धि है जिसे लेकर यहां के वैज्ञानिकों में उत्सुकता और उत्साह के साथ ही रोमांच की अनुभूति है।
डॉ. अनिल पांडे ने कहा कि सूर्यग्रहण के विपरीत चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से व लंबे समय तक निहारने में भी कोई खतरा नहीं होता है। अत: लोग इसे निश्चिंत होकर देख व साधारण कैमरे से इसकी तस्वीरें ले सकते हैं।