राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार का ये फैसला सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। सभी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के तहत बढ़ी हुई सैलरी दीवाली से मिलेगी।
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trivendra singh rawat
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में बृहस्पतिवार को उत्तराखंड के करीब दो लाख राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत 50 फीसदी एरियर जारी करने और एक फीसदी डीए बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई। कर्मचारियों का जनवरी-2016 से दिसंबर 2016 के बीच का एरियर बकाया है।
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पेंशन
पुरानी पेंशन योजना में शामिल कर्मचारियों का एरियर और डीए का पैसा जीपीएफ खाते में जाएगा। वहीं, सातवें वेतन आयोग के तहत भत्तों के निर्धारण के लिए कैबिनेट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, जो इसकी तिथि का निर्धारण करेगी।
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- फोटो : money
दो लाख राज्यकर्मियों को सातवें वेतनमान के बकाया एरियर की पचास फीसदी राशि का भुगतान हो जाएगा। इससे सरकारी खजाने पर 600 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। यह फायदा उन्हीं विभागों और निगमों के कर्मचारियों को मिलेगा, जहां सातवां वेतनमान लागू हो गया है।
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सातवें वेतनमान का 50 प्रतिशत एरियर और केंद्र की तर्ज पर 5 जुलाई 2017 से एक प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान करने के मंत्रिमंडल के फैसले से कर्मचारियों में खुशी की लहर है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कैबिनेट के फैसले का स्वागत कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार जताया है
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परिषद का कहना है कि उनकी मांग पर विभिन्न संवर्गों के वेतन विसंगतियों की सुनवाई के लिए गठित वेतन समिति की संस्तुतियों को दोबारा वेतन समिति को वापस करने व राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के आधार पर अनुमन्य भत्तों के लिए वेतन समिति के प्राप्त संस्तुतियों का परीक्षण करने को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिव, वित्त, कार्मिक को शामिल कर समिति का गठन करने का निर्णय भी किया गया है।
यह समिति शीघ्र ही मंत्रिमंडल के समक्ष अपनी संस्तुतियां प्रस्तुत करेगी। परिषद के प्रवक्ता अरुण पांडे ने बताया कि कार्मिकों की मांग पर मंत्रिमंडल ने वेतन समिति की रिपोर्ट वापस करने का निर्णय लिया है। कई मांगों पर फैसला नहीं हुआ है। इसमें 17 फरवरी 2017 को जारी एसीसी के शासनादेश में संशोधन, यू-हेल्थ कार्ड, वाहन भत्ता आदि मांगें शामिल हैं। परिषद की मांग है कि वेतन समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। परिषद व संबंधित संवर्गों के कर्मचारी संगठनों से भी तत्काल वार्ता कर विसंगतियों का निराकरण किया जाए।