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रशियन जोड़े ने इसलिए मां गंगा की शरण में आकर बांधा सात जन्मों का बंधन, जानकर आप भी देंगे आशीर्वाद

Mon, 14 May 2018 04:53 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, मुनिकीरेती(ऋषिकेश)
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marriage in rishikesh
सात समंदर पार आकर विदेशी जोड़ने ने सात फेरे लिए तो देखने वालों का भी जमावड़ा लग गया। आप भी देखिए....
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marriage in rishikesh
परमार्थ निकेतन आश्रम गंगा तट पर वैदिक विधि विधान के साथ रूस के सोची शहर से आए रशियन जोड़ा हिंदू रीति रिवाज के साथ विवाह बंधन में बंध गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने वर रुस्लान और वधु वेलोवाइवा को सुख, शांति व समृद्ध जीवन का आशीर्वाद दिया और रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
 
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marriage in rishikesh
बताया गया कि इस दौरान वर-वधु को एक ही माला पहनाकर दो शरीर एक प्राण की तरह जीने का संदेश दिया गया। आश्रम की ओर से बताया गया कि विवाह के लिए परमार्थ गंगातट पर इस जोड़े को भारतीय संस्कृति और संस्कारों की महिमा खींच लाई।

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marriage in rishikesh
भौतिकता से दूर आध्यात्मिक वातावरण में वेदमंत्रों के साथ रुस्लान और वेलोवाइवा ने सात फेरे लेकर रूस की संस्कृति के साथ भारत की संस्कृति को भी आत्मसात किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने विवाह संपन्न कराया।
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शादी
इस दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि विवाह में केवल दो दिलों का नहीं बल्कि दो परिवारों का मेल भी होता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के तट पर दुनिया के दो देशों की संस्कृतियों का मिलन एक ऐतिहासिक अवसर है। जब लोग गोवा के तट को छोड़कर गंगा के तट पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की शुरुआत गंगा तट से शुरू हो, तो जीवन भी गंगा सागर बन जाता है।
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