फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

15 जिंदगियां हुईं खत्म: नगरासू घटना की याद दिला गया टेंपो-ट्रैवलर हादसा, चीखों से गूंजता रहा अलकनंदा का किनारा

Sun, 16 Jun 2024 05:12 PM IST
अलका त्यागी विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
विज्ञापन
1 of 5
रुद्रप्रयाग हादसा - फोटो : अमर उजाला
ऋषिकेश-बदरीनाथ पर रैंतोली में हुआ टेंपो-ट्रेवलर हादसा मई 2005 में नगरासू में बरात बस दुर्घटना के मंजर जैसा था। अलकनंदा नदी का किनारा घायलों की चीख-पुकार से गूंज रहा था। शरीर से निकल रही खून की धार असहनीय दर्द को बयां कर रही थी। वाहन चालक की एक नींद की झपकी ने स्वयं के साथ अन्य 13 लोगों की जिंदगी को लील लिया।

नई दिल्ली से हंसी-मजाक के साथ चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशिला की ट्रेकिंग के लिए निकले 23 युवाओं के दल को क्या पता था, कि शनिवार की सुबह उनके लिए चीख-पुकार की बन जाएगी। सुबह 6 बजे ऋषिकेश से आगे बढ़ते हुए रुकते, हंसते-गाते युवा टेंपो-ट्रेवलर में अपने मंजिल की तरफ बढ़ रहे थे।

हाईवे के तीखे मोड़ और भूस्खलन जोन से सकुशल गुजरता वाहन जब रुद्रप्रयाग नगर के समीप रैंतोली में चौड़ी सड़क पर पहुंचा तो रफ्तार भी तेज हो गई, पर अभी कुछ ही दूरी तय ही हो पाई थी कि 15 मीटर चौड़ी सड़क पर वाहन अनियंत्रित होकर नीचे की तरफ लगे पैराफिट तोड़कर सीधे अलकनंदा नदी में जा गिरा और पलभर में सबकुछ खत्म हो गया।

15 लोगों की मौत: लापरवाही...20 सीटर वाहन में बैठे थे 26 लोग, पहली बार आए थे उत्तराखंड, बन गया आखिरी सफर
विज्ञापन

2 of 5
रुद्रप्रयाग हादसा - फोटो : अमर उजाला
हंसी, खुशी का सफर नींद की झपकी से चीख-पुकार में बदल गया। हादसे में घायल हुई वंदना और नमिता ने बताया कि घूमने के लिए जा रहे थे, वाहन नदी में गिरा उसके बाद कुछ पता नहीं क्या हुआ। स्थानीय निवासी सुनीत चौधरी व बद्री नौटियाल बताते हैं कि इस दर्दनाक हादसे ने मई 2005 में नगरासू में स्वीत गांव की बारात की बस दुर्घटना के मंजर की याद दिला दी। तब, जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से 17 किमी दूर नगरासू के समीप बारातियों से भरी बस पलभर में अलकनंदा नदी किनारे गिर गई थी।

विज्ञापन

3 of 5
रुद्रप्रयाग हादसा: अलकनंदा में गिरा वाहन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सड़क से चट्टान में गिरते ही बस की छत उखड़ गई थी, जिससे कई बाराती छिटक कर चट्टान के पत्थर पर टकराकर अकाल मौत का ग्रास बन गए थे। उस हादसे ने स्वीत गांव के सामाजिक ढर्रे को ही बदलकर रख दिया था। हादसे में 38 बरातियों की मौत हेा गई थी।

4 of 5
रुद्रप्रयाग हादसा: अलकनंदा में गिरा वाहन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डेढ़ दशक पहले हुआ था हादसा, आठ की हुई मौत
रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रैंतोली में जिस जगह पर टेंपो-ट्रेवलर अनियंत्रित होकर नदी में गिरा, उसी जगह पर डेढ़ दशक पूर्व एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में आठ शिक्षक-शिक्षिकाओं की मौत हो गई थी। पत्रकार बद्री नौटियाल बताते हैं कि उस समय भी भी वह रेस्क्यू के दौरान मौके पर गए थे, तब वाहन में सवार किसी का पता नहीं चल सका था। शनिवार को हुआ हादसा भी उसी जगह पर हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
रुद्रप्रयाग हादसा - फोटो : अमर उजाला
चट्टान गिरने से छह यात्रियों की हुई मौत
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर तलसारी के समीप पहाड़ी से टूटी चट्टान की चपेट में एक यात्री वाहन आ गया था, इस हादसे में 6 यात्रियों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व 2019 में हाईवे पर फाटा के समीप वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से 8 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व 2017 दिसंबर में गौरीकुंड हाईवे पर बांसवाड़ा के समीप ऑलवेदर रोड परियोजना के कार्य के दौरान पहाड़ी से गिरे मलबे से आठ मजदूरों की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें