मुंबई इंडियंस ने पुणे सुपर जायंट्स को हराकर भले ही ipl की विजेता टीम का खिताब अपने नाम कर लिया हो लेकिन, एक प्लेयर ऐसा है जो इस टीम में न होने के बाद भी सबके दिलों पर राज कर गया।
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आईपीएल-10 में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम से खेले उत्तराखंड में रुड़की के ऋषभ पंत ने अपनी शानदार बल्लेबाज से सबके दिल जीत लिए। इतनी कम उम्र में उनके शानदार प्रदर्शन के कारण ही उन्हें कोई भूल नहीं सकता।
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हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए तीसरे टी-20 मैच से भारतीय क्रिकेट टीम में प्रवेश करने वाले ऋषभ पंत ने पिता की मौत के बाद जो साहस दिखाया आज हर कोई उसकी सराहना कर रहा है। इतना ही नहीं विदेशों में भी ऋषभ के साहस को सराहा जा रहा है।
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Rishabh Pant
आईपीएल शुरू होने से पहले ऋषभ के पिता का निधन हो गया था। लेकिन ऋषभ ने आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के लिए मैच खेलने का साहस दिखाया था और अच्छी पारी खेली थी। दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने भी विकेटकीपर और बल्लेबाज ऋषभ पंत को भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी बताया।
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ऋषभ पंत
डेयरडेविल्स के कप्तान द्रविड़ ने कहा था कि ऋषभ की तारीफ की और कहा कि इस साल ऋषभ का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। आईपीएल में उन्होंने निजी दुख पर काबू पाकर टूर्नामेंट में हिस्सा लिया जोकि उनकी मानसिक मजबूती का दर्शाता है।
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Rishabh Pant
- फोटो : AmarUjala
बता दें कि इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए तीसरे टी-20 मैच से भारतीय क्रिकेट टीम में प्रवेश करने वाले ऋषभ पंत को ये सुनहरा मौका ऐसे ही नहीं मिला। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत और संघर्ष किया है। अच्छे प्रदर्शन के बल पर भारतीय टी20 क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाले ऋषभ पंत को ने रणजी क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज शतक जमाया।
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ऋषभ पंत
- फोटो : IPL
इस युवा बल्लेबाज ने अंडर-19 विश्व कप के दौरान भी सुर्खियां बटोरी थी। इसके बाद दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम में पंत को जगह मिली तो 2016 में उन्होंने अपना पहला रणजी मैच खेला। मगर अपने अच्छे दिनों से पहले ऋषभ पंत ने काफी बुरे दिन भी देखें हैं। एक दौर था जब पंत को गुरूद्वारे में रात गुजारनी पड़ती थी और वहीं लंगर का खाना खाकर वह क्रिकेट की प्रेक्टिस करने जाया करते थे।
दिल्ली के मशहूर क्रिकेट क्लब सोनेट में ही पंत ने क्रिकेट की बारिकियां सीखी। कई इंटरनेशनल खिलाड़ी देने वाले इस क्लब के कोच तारक सिन्हा का कहना था कि हम एक टैलेंट हंट कराते थे जिसके बारे में पंत ने सुना था। वह रूड़की से दिल्ली सिर्फ इस टैलेंट हंट में भाग लेने चला आया। दिल्ली शहर में उसकी जान पहचान का कोई नहीं था। इसलिए वह मोतीबाग गुरूद्वारे में रूकता था वहीं लंगर खाकर प्रेक्टिस के लिए आता जाता था।