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#Republic Day: आज इस हाल में है भारत-पाक युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला जांबाज

Sat, 27 Jan 2018 08:48 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तानियों के छक्के छुड़ाने वाले जाबांज सिपाही ही हालत आज क्या हो गई कि उनके पास भरपेट खाने तक के लिए पैसे नहीं है।
 
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हम बात रहे हैं भारत-पाक युद्ध के योद्धा रहे कैप्टन विजेंद्र गुरुंग जोहड़ी गांव में दयनीय जीवन बिताने को मजबूर हैं। लघु सेवा कमीशन अधिकारी कैप्टन विजेंद्र सिंह गुरुंग ने 3 आसाम में शॉर्ट सर्विस कमिशन के पद पर तैनात थे। 1971 के युद्ध से पहले अखनूर सेक्टर में उनकी बटालियन तैनात थी। 
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जहां 1971 के भारत युद्ध में जम्मू-कश्मीर के चंब जौरीय क्षेत्र में विजेंद्र कहीं खो गए थे। बताया जाता है कि उन्हें 03 दिसंबर 1971 को जब पाकिस्तान चंब क्षेत्र की रैकी करने पहुंचा था, तब उन्हें कैदी के रूप में वो कई अन्य वीर के साथ ले गये थे।

 

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1971 का भारत पाक युद्ध
मामला प्रकाश में आने पर भाजपा नेता गणेश जोशी उनके मिलने गए थे। वहीं जब मीडिया ने इस मामले को सामने लाया तो आज गणतंत्र दिवस  के मौके पर सांसद तरूण विजय ने उन्हें 25000 रुपए का चैक से आर्थिक मदद प्रदान की।
 
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1971 का भारत पाक युद्ध
जानकारी के मुताबिक, पाक जेल में एक वर्ष से अधिक समय तक उन्होंने खूब यातनाएं झेली। लेकिन वो जैसे-तैसे 1973 में भारत वापस लौट आये थे। लेकिन भारत लौट आने के बाद भी कैप्टन विजेंद्र सिंह गुरुंग की परेशानी कम नहीं हुई।
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1971 का भारत पाक युद्ध
पाक जेल में अमानवीय उत्पीड़न के कारण वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। उसके बाद मीलिटरी हॉस्पिटल एमएच में मनश्चिकित्सीय उपचार नहीं दिया गया। कारण ये था कि उन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया गया। जिसका खामियाजा वो आजतक भुगत रहे हैं।
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कैप्टन विजेंद्र सिंह हाल ही में देहरादून में एक दयनीय जीवन बिताने को मजबूर हैं। वो एक मजदूर के रूप में काम करते हैं और एक छोटी सी झोपड़ी में रहते हैं। लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। गौरतलब है कि विजेंद्र सिंह ने किंग जॉर्ज के मिलिट्री स्कूल, चेल, हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा ग्रहण की थी।
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