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घोड़े 'शक्तिमान' की प्रतिमा से CM रावत ने क्यों मोड़ा मुंह, विरोध से डरे या टोटका?

Tue, 12 Jul 2016 12:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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shaktimaan statue - फोटो : अमरउजाला
देहरादून में भाजपा विधायक के कथित हमले में घायल हुए पुलिस के घोड़े शक्तिमान की प्रतिमा के अनावरण से उत्तराखंड सीएम हरीश रावत ने ऐन वक्त पर इनकार कर दिया।
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police horse shaktiman statue - फोटो : अमरउजाला
सीएम ने यह फैसला तब लिया जब अधिकारी शक्तिमान की प्रतिमा के अनावरण की पूरी तैयारी कर चुके थे। अधिकारी भी सीएम का इनकार सुन भौचक रह गए। ऐसे में हरीश रावत द्वारा प्रतिमा के अनावरण से इनकार से कई सारे सवाल खड़े हो रहे हैं।
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शक्तिमान - फोटो : AmarUjala
आइए जानते हैं कि पहले शक्तिमान का मुद्दा जोर-शोर से उठाने वाले सीएम ने आखिर किस वजह से ऐन वक्त पर प्रतिमा अनावरण से कदम पीछे खींच लिए। हालांकि सीएम ने कहा है कि वह इसे राजनैतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते। पर यह कितना सच है?

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घायल घोड़ा - फोटो : amar ujala
14 मार्च को भाजपा की विधानसभा के सामने हुई भाजपा की रैली में पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग टूट गई थी। शक्तिमान के घायल होने की वजह भाजपा विधायक गणेश जोशी द्वारा उस पर हमला बताया गया।
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घोड़े पर लाठी भांजते विधायक गणेश जोशी - फोटो : AnilDogra/AmarUjala
शक्तिमान पर हमला करते हुए विधायक गणेश जोशी की तस्वीरें वायरल हो गई थीं। इसे देश दुनिया में खूब देखा गया था। इस मामले में भाजपा विधायक पर मुकदमा कायम है।
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पुलिस का घोड़ा शक्तिमान - फोटो : amar ujala
शक्तिमान के इलाज के लिए अमेरिका से डॉक्टर बुलाए गए। गैंगरीन फैलने से बचने के लिए घायल टांग को काटना पड़ा था। उसकी जगह नई टांग लगाई गई लेकिन इन सबके बावजूद शक्तिमान को बचाया नहीं जा सका।
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शक्तिमान - फोटो : AmarUjala
टांग के इलाज के लिए एनेस्थीसिया देने के दौरान शक्तिमान हमेशा के लिए सो गया। इसके बाद शक्तिमान को सम्मान देने की राजनीति शुरू हुई।  शक्तिमान की मौत एक बार फिर सुर्खी बनी।

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shaktimaan statue - फोटो : अमरउजाला
उत्तराखंड की कांग्रेस की सरकार ने शक्तिमान को सम्मान देने की बात कहते हुए राजधानी देहरादून के रिस्पना चौक पर शक्तिमान की प्रतिमा लगाने का फैसला लिया। रिस्पना चौक का नाम शक्तिमान चौक रखने का फैसला लिया गया। पुलिस ने भी अस्तबल के बाहर शक्तिमान की प्रतिमा लगाने की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए।

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shaktimaan statue - फोटो : अमरउजाला
पुलिस लाइन की प्रतिमा करीब दस दिन पहले बनकर तैयार हो गई थी, जबकि रिस्पना पुल की प्रतिमा को तीन दिन पहले स्थापित किया गया। एमडीडीए को उसके सौंदर्यकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 

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शक्तिमान - फोटो : amar ujala
इसी दौरान शक्तिमान की प्रतिमा लगाने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध होने लगा। चर्चाएं होने लगीं कि सरकार उत्तराखंड की महान विभूतियों को छोड़कर घोड़े की प्रतिमा लगा रही है जो कि गलत है। गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के आंदोलनकारियों को सम्मान देने की मांग उत्तराखंड में होती रही है।

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पुलिस का घोड़ा शक्तिमान - फोटो : amar ujala
आंदोलन में भाग लेने वाले कहते रहे हैं कि अलग राज्य बनने के 16 साल बाद अभी तक की सरकारें आंदोलनकारियों को उचित सम्मान नहीं दे सकी है।

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for winning harish rawat took help of magic
माना जा रहा है ‌प्रतिमा अनावरण के बाद किसी विवाद से बचने के लिए सीएम ने प्रतिमा अनावरण से पीछे कदम पीछे खींचे हैं। वहीं कुछ चर्चा यह भी है कि इस फैसले के पीछे कोई टोटका है।

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for winning harish rawat took help of magic
सीएम हरीश रावत धर्म-कर्म में बहुत विश्वास करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि हर काम के पहले सीएम शुभ मुहूर्त का जरूर ध्यान देते हैं।

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for winning harish rawat took help of magic
विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान भी यह बात सामने आई थी। उस दौरान सीएम अपने एक हाथ में कोई चीज रखे हुए थे और एक हाथ में उसे लिए हुए घूमते रहे थे। सीएम की इस तस्वीर ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
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for winning harish rawat took help of magic
ऐसे में सवाल यह है कि सीएम ने शक्तिमान की प्रतिमा अनावरण से पीछे हटने के पीछे विरोध वजह है या टोटका? या फिर कोई तीसरी वजह जैसा कि सीएम खुद कह रहे हैं कि वह इसे राजनैतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते?

Published By: Vivek Singh
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