पांडुलिपि
- फोटो : अमर उजाला
तल्ला नागपुर के सुपुरी गांव में मिली पांडुलिपियां तीन भाषाओं में रची गई हैं। पुरानी हिंदी, संस्कृत व गढ़वाली भाषा में पांडुलिपियों की रचना की गई हैं। इतिहासकार डा. कठोच को मिली पांडुलिपियों में आयुर्वेद के कई रहस्य समाए हुए हैं। इन पांडुलिपियों में एक भाव प्रकाश नामक पांडुलिपि है, जिसमें आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की अनेक अनछुई पद्धतियों पर विस्तार से लिखा गया है। इतिहासकार डा. कठोच के मुताबिक सुपुरी गांव में राजशाही दौर के अनेक अस्त्र-शस्त्र भी हैं, इनमें तोप की नली, तीर और अनेक प्रकार के समकालीन खंजर शामिल हैं।