इस बार गणेश चतुर्थी पर सालों बाद अद्भुत संयोग पड़ रहा है। 13 से 23 सितंबर तक चलने वाले गणेश महोत्सव को लेकर हर कोई उत्सहित है। ऐसे में अगर आप इस तरह से पूजन करेंगे तो आपको दोगुना फल मिलेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित संतराम के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी पर गुरू स्वाति योग बन रहा है। भगवान गणेश सुख और समृद्धि के देवता हैं इसलिए यह योग अधिक फलदायी होगा। चतुर्थी बुधवार 12 सितंबर को शाम 04:08 से शुरू होगी जो कि 13 सितंबर दिन गुरुवार को दोपहर 02.52 तक रहेगी। चतुर्थी के गुरूवार को पड़ने से ये महासंयोग बन रहा है।
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गणेश चतुर्थी पर पूजन के लिए सुबह 11:10 बजे से दोपहर 01:38 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। वहीं इस बार गणेश पूजा में राहु दोष से भी मुक्ति मिलेगी। इस दिन की गई गणेश स्थापना से आपके जीवन में आ रही बाधाएं खत्म हो जाएंगी, साथ ही आपको जीवन में कामयाबी मिलेगी। लेकिन पूजा के समय ये गलतियां न करें।
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शास्त्रों में कहा गया है कि, गणेश जी की पीठ के दर्शन करना अशुभ फलदायी होता है। गणेश जी की पीठ पर दरिद्रता का निवास होता है। मान्यता है कि, इसके दर्शन करने से व्यक्ति का दुर्भाग्य आता है। इससे किस्मत वाले लोग भी कंगाल हो जाते हैं।
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अगर आप अपने घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि, उनका मुख हमेशा दक्षिण व पश्चिम दिशा की ओर हो। इसके विपरीत दिशा में मुंह होने से घर में दरिद्रता आती है। इसलिए शुभ फल के लिए मूर्ति सही दिशा में स्थापित करें।
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अगर आप घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं तो प्रतिमा बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए। अगर खुद नदी की मिट्टी से प्रतिमा बनाएं तो उसका फल सर्वश्रेष्ठ होता है। वहीं पूजा के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत का समापन न करें।
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- फोटो : अमर उजाला
गणेश पूजा के समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा में तुलसी न चढ़ाएं। कहा जाता है कि तुलसी को गणेश ने श्राप दिया था। जिसके बाद से ही तुलसी को गणेश पूजा से वर्जित कर दिया गया था। ऐसा करने से गणेश जी नाराज हो जाते हैं।
गणेश पूजन में सफेद फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। गणेश जी का पूजन लाल फूल से करना चाहिए। गणेश जी उत्साह और ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं। वहीं उन्होंने चंद्रमा को उनका उपहास करने पर श्राप दिया था। जिसके बाद ही सफेद चीजें उनकी पूजा में वर्जित मानी जाती हैं।