उन्होंने कहा कि आजादी तब मिली थी, जब सरदार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां को फांसी दी गई, लेकिन वह हिंसा में विश्वास नहीं रखते हैं। जिस पर उन्होंने अपना अनशन टाल दिया था। आध्यात्म के प्रचार प्रसार के लिए उनकी सेवाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।