इस बार बहनें खास योग में अपने भाई की कलाई पर राखी सजाएंगी। इस बार 19 साल बाद स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का एक साथ योग बना है। इससे पहले यह संयोग साल 2000 में बना था।
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बहनें सिद्धि योग में भाइयों को रक्षा सूत्र बांधेंगी। आचार्य सुशांत राज ने बताया कि सावन पूर्णिमा के दिन ही श्रवण नक्षत्र की शुरुआत होती है। इस नक्षत्र में किया गया कार्य शुभ होता है।
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वहीं, बृहस्पतिवार का दिन होने के कारण भी इसका महत्व बढ़ जाता है। गंगा स्नान, शिव पूजन व विष्णु पूजन करने से आयु, अरोग्य, विद्या-बुद्धि सहित हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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उन्होंने बताया कि श्रवण नक्षत्र प्रात: 8:01 बजे तक ही है। इसके बाद घनिष्ठा नक्षत्र आ जाएगा। इसलिए रक्षा बंधन का कार्य सुबह ही कर लेंगे तो अतिशुभ होगा।
गुरुवार को पूर्णिमा तिथि व श्रवण नक्षत्र के मिलने से सिद्धि योग बन रहा है। इस दिन पूर्णिमा शाम 4:23 बजे तक रहेगी। इसलिए चार बजे तक भी राखी बांधी जा सकती है।