radhe maa
मालूम हो कि राधे मां को वर्ष 2012 में हरिद्वार के जूना अखाड़े में सभी नियम तोड़कर आधी रात के समय जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की थी। अगले ही दिन उन्हें महामंडलेश्वर बनाने को लेकर तमाम अखाड़ों और षड़दर्शन साधु समाज में तूफान खड़ा हो गया था। राधे मां का जीवन दर्शन जिस प्रकार का रहा है, वह कभी भी संत जगत को नहीं भाया। राधे मां का अखाड़े में प्रवेश जूना अखाड़े के ही महामंडलेश्वर स्वामी पंचदेवानंद गिरि ने अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि से कराया था।