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जल्द बदल जाएगा राधे मां का मिजाज, अब न गोद में बैठेंगी, न नाचेगी, अपनी पोशाक भी बदल देंगी 

Tue, 11 Dec 2018 10:19 AM IST
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार में राधे मां - फोटो : amar ujala file photo
अखाड़े में वापसी के साथ ही बहुचर्चित महिला संत राधे मां का पूरा मिजाज ही बदला हुआ नजर आएगा। दस नाम संन्यासियों के सबसे बड़े जूना अखाड़े को उन्होंने लिखकर दिया है कि वे अब न तो भक्तों को फ्लाइंग किस देंगी और न ही चौकी लगाते हुए उछलकर भक्तों की गोद में बैठेंगी।
 
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राधे मां - फोटो : SELF
यही नहीं वे अपनी लाल रंग की पोशाक भी बदल देंगी। प्रयाग अर्द्धकुंभ में जाने से पूर्व भगवा धारण कर लेंगी और फिर जीवन भर भगवा ही पहनेंगी। महिला साध्वियों की भगवा पोशाक धारण कर वे कुंभ में हाथी पर सवारी करेंगी। अखाड़े ने राधे मां को साफ कह दिया है कि यदि उन्होंने पूर्व की भांति इस बार भी नियम तोड़ा तो उन्हें दोबारा माफी नहीं दी जाएगी। अखाड़ा परिषद की ओर से घोषित फर्जी संत की सूची से उनका नाम बाहर कराने का काम भी जूना अखाड़ा करेगा। 
 
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radhe maa
मालूम हो कि राधे मां को वर्ष 2012 में हरिद्वार के जूना अखाड़े में सभी नियम तोड़कर आधी रात के समय जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की थी। अगले ही दिन उन्हें महामंडलेश्वर बनाने को लेकर तमाम अखाड़ों और षड़दर्शन साधु समाज में तूफान खड़ा हो गया था। राधे मां का जीवन दर्शन जिस प्रकार का रहा है, वह कभी भी संत जगत को नहीं भाया। राधे मां का अखाड़े में प्रवेश जूना अखाड़े के ही महामंडलेश्वर स्वामी पंचदेवानंद गिरि ने अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि से कराया था।
 

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radhe maa
जूना अखाड़ा सूत्रों के अनुसार महामंडलेश्वर उपाधि के बदले राधे मां ने हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी के जीर्णोद्धार का वचन दिया था। लेकिन भारी विरोध के कारण जूना अखाड़े को दो दिन बाद ही दी गई महामंडलेश्वर की उपाधि वापस लेनी पड़ी थी। अब प्रयाग कुंभ से पूर्व राधे मां ने जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि को पत्र लिखकर दिया है।
 
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पत्र के अनुसार वे उन तमाम गतिविधियों से दूर रहेंगी जिसके कारण वे चर्चित रही हैं। उन्होंने लिखित माफीनामा देते हुए माना कि वे माता की चौकी में भक्तों को फ्लाइंग किस देती थी और उनकी गोद में जा बैठती थी। भविष्य में संतोचित शालीन वस्त्र धारण करेंगी और कभी भी अखाड़े की मर्यादा को भंग नहीं करेंगी।  
 
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हरिद्वार में राधे मां - फोटो : amar ujala
प्रयाग में निकलने वाली अखाड़े की पेशवाई और सभी तीन प्रमुख कुंभ स्नान पर्वों पर राधे मां का बदला रूप नजर आएगा। वे अपने हजारों भक्तों के साथ स्नान करने आएंगी और नागा संन्यासियों की जमात में शामिल होकर हाथी पर बैठते हुए शाही जुलूस में निकलेंगी। राधे मां भगवा धारण करेंगी और भविष्य में केश भी नहीं कटवाएंगी।
 
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अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि लिखित माफीनामे पर पूर्ण विश्वास कर लिय गया है। उम्मीद है कि अब राधे मां महामंडलेश्वर पद की खास जिम्मेदारी को महसूस करते हुए सदा भगवा वस्त्र धारण करेंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी संत को अखाड़े की परंपरा तोड़ने का अधिकार नहीं है। प्रसन्नता का विषय है कि अब राधे मां ने संतों के संस्कारों को भली-भांति समझ लिया है।
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