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चारधाम श्राइन बोर्ड पर पंडा, पुरोहितों में उबाल, विधानसभा कूच के दौरान पुलिस ने किया गिरफ्तार 

Tue, 10 Dec 2019 10:15 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : अमर उजाला
चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन को लेकर चारधाम हक हकूकधारी एवं तीर्थ पुरोहितों में उबाल है। तीर्थ पुरोहितों ने बोर्ड के गठन को धाम और मंदिरों की स्वायत्ता पर हमला करार देते हुए सोमवार को धर्मपुर से विधानसभा की ओर कूच किया, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रिस्पना पुल से आगे नहीं बढ़ने दिया। इस पर हक हकूकधारी और तीर्थ पुरोहित सात घंटे तक रिस्पना पुल के पास धरने पर बैठे रहे। जिन्हें देर शाम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि पुलिस की ओर से बताया गया कि देर शाम तक मात्र दस लोगों के चालान हुए हैं।



  
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- फोटो : अमर उजाला
आंदोलन को कांग्रेस और भाकपा माले सहित कुछ अन्य संगठनों ने भी अपना समर्थन देते हुए सरकार से श्राइन बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की। चारधाम हक हकूकधारी तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने सोमवार को नेहरू कालोनी और धर्मपुर से विधान सभा कूच किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रिस्पना पुल से आगे नहीं बढ़ने दिया गया। इस बीच महापंचायत से जुड़े लोग रिस्पना पुल के पास हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग के बीचों बीच धरने पर बैठ गए।
 
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- फोटो : अमर उजाला
यहां हुई सभा में हक हकूकधारियों और पंडा पुरोहितों ने कहा कि सरकार की नजर तीर्थों की भूमि पर है। बोर्ड के गठन से न सिर्फ तीर्थ पुरोहितों और हक हकूकधारियों बल्कि घोड़ा, कंडी और छोटे व्यवसाय से जुड़े लोगों के हित भी प्रभावित होंगे। आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि कांग्रेस हक हकूकधारियों और तीर्थ पुरोहितों की लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी।
 

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- फोटो : अमर उजाला
केदारनाथ विधायक मनोज रावत, भगवानपुर की विधायक ममता राकेश, जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, गरिमा दसौनी आदि ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। वही डिमरी पंचायत के प्रवक्ता पंकज डिमरी व भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि श्राइन बोर्ड मंदिरों की स्वायत्ता पर हमला है। पूर्व में अंग्रेजों और मुस्लिम शासकों द्वारा भी इस तरह के प्रयास किए जाते रहे हैं। बद्रीनाथ ब्रह्मकपाल के तीर्थ पुरोहित आचार्य नरेशानंद नौटियाल और धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने कहा कि बोर्ड के गठन को लेकर सरकार ने सभी को अंधेरे में रखा है।
 
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि वैष्णो देवी और उत्तराखंड में स्थित चार धामों एवं मंदिरों की व्यवस्थाएं अलग हैं। सरकार बोर्ड के गठन के प्रस्ताव को निरस्त करे। देर शाम धरने पर बैठे तीर्थ पुरोहितों की ओर से दावा किया गया कि दो सौ से अधिक आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। विस कूच करने एवं धरना देने वालों में चारधाम महापंचायत के अध्यक्ष कृष्णकांत कोटियाल,  यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन उनियाल, गंगोत्री समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल, श्री बद्री केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य दिनकर बाबूलकर आदि शामिल रहे। 
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श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि राज्य सरकार को हरकी पैड़ी समेत हरिद्वार और उत्तराखंड के मठों आश्रमों और मंदिरों को श्राइन बोर्ड से बाहर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मठ मंदिरों को श्राइन बोर्ड में शामिल करती है तो अखाड़ा परिषद इसका पुरजोर विरोध करेगी। मुख्यमंत्री से मिलकर भी वे इस बारे में अपनी राय रखेंगे।  
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