शहीद बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर मां सरोज पर टूटा दुखों का पहाड़
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लेकिन, फिर एक वीरांगना की तरह अपने आंसू रोके और कमरे के कोने में रखी विभू की तस्वीर की तरफ देखकर बोली...बुआ, वह हीरो है। उसके लिए रोना मत, मेरा मेजर हीरो है...कहते-कहते पत्नी की आंखें फिर नम हो गईं। आसपास बैठे पड़ोसी और रिश्तेदारों की आंखें भी इन हृदयविदारक बातों को सुन और पलों को देखकर नम हो गईं।