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यहां पुजारी भी नहीं कर सकता देवता के दर्शन, साल में एक दिन खुलते हैं कपाट

Wed, 21 Feb 2018 06:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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LATU DEVTA TEMPLE
दुनिया में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां पुजारी को भी देवता के दर्शन करने की इजाजत नहीं है। इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक दिन खुलते हैं। उस दिन पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं।
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LATU DEVTA TEMPLE
यह ऐतिहासिक मंदिर चमोली जिले के दूरस्थ गांव वाण में है। यह हिमालय की आराध्य देवी मां नंदा (पार्वती) के धर्मभाई लाटू का मंदिर है। मान्यता है कि मंदिर में साक्षात नागराज अपनी औलोकिक मणि के साथ विराजमान हैं। यही कारण है कि मंदिर के अंदर से दर्शन करने की इजाजत किसी को नहीं है।
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LATU DEVTA TEMPLE
वर्ष में एक बार बैशाख मास की पूर्णिमा के मौके पर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। पुजारी अपनी आंख, नाक और कान को पट्टी से ढ़ककर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।
 

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लाटू देवता - फोटो : amarujala
प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित होने वाले हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राज जात का 12वां पड़ाव वाण गांवव में होता है। वाण से लेकर अंतिम पड़ाव होमकुंड तक लाटू ही मां नंदा की आगवानी करते हैं।
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Raj Rajeshwari and latu baba - फोटो : amar ujala
मंदिर के भीतर श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति भले ही न होती हो लेकिन बाहर से दर्शनों के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यह ऐतिहासिक मंदिर समुद्र तल से करीब 8500 फीट की ऊंचाई पर एक बड़े देवदार के पेड़ के नीचे बना है।
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