बृहस्पतिवार सुबह से ही मासूम बच्ची के पिता पॉक्सो कोर्ट के इर्द-गिर्द बेचैनी से घूम रहे थे। उन्हें अपनी बेटी के साथ हुई हैवानियत पर न्याय की पूरी उम्मीद थी। जैसे ही पॉक्सो कोर्ट की जज नीलम रात्रा ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई तो मासूम के पिता की आंखें छलक पड़ीं।
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काशीपुर निवासी मासूम के पिता का कहना था कि आज उनकी बेटी की आत्मा को शांति मिली होगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले से उनकी बेटी को न्याय मिला है अब जल्द से जल्द दोषी को फांसी होनी चाहिए।
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नौ महीने बाद ही सही आखिरकार न्याय मिला तो मासूम बच्ची की मां के दिल को सुकून मिल गया। आंखें नम पर दिल में संतोष था कि आखिर उसकी बच्ची के कातिल को फांसी की सजा मिली। जिसने भी न्यायालय के इस फैसले के बारे में सुना उसने यही कहा कि बच्चों के साथ दरिंदगी करने वाले आरोपियों को फांसी की ही सजा मिलनी ही चाहिए।
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करीब नौ माह पूर्व 25 जून 2016 की रात टांडा निवासी सात वर्षीय बच्ची अपने भाई बहनों के साथ अलीगंज रोड पर एक सार्वजनिक जागरण में गई थी। 26 जून की सुबह बच्ची का शव सब्जी के खेत में मिला था। पुलिस ने इस मामले में करनदीप सिंह को गिरफ्तार किया था। बच्ची के साथ दुराचार कर उसकी हत्या की गई थी। अब आरोपी को सजा मिलने के बाद बच्ची के परिजन संतुष्ट हैं।
परिजनों ने कहा कि आरोपी को फांसी की सजा मिलने से उनकी बेटी की आत्मा को आज शांति मिली होगी। फैसले की जानकारी मिलने पर घर में मौजूद बच्ची की मां अपनी बच्ची की फोटो सीने से लगाई रही। खामोस मां ने कहा तो कुछ नहीं लेकिन भीगी आंखों और खामोशी ने सबकुछ बयां कर दिया।