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पुलिस ने खोला राज, ऐसा होता तो बच जाती भाजपा के कार्यक्रम में जहर खाने वाले फरियादी की जान

Tue, 09 Jan 2018 10:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Prakash Pandey
बदकिस्मती से ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडेय अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन पुलिस ने रिकॉर्ड तैयार किया है उसके बिनाह पर अगर ऐसा होता तो उसकी जान बच जाती।
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prakash panday
ठेकेदारों पर फंसी 11 लाख रुपये की रकम मिल जाती तो यह अनहोनी टल सकती थी। पुलिस ने कारोबार, ऋण और बैंक खातों को लेकर पांडेय की जो कुंडली तैयार की है, उसमें यह तथ्य प्रमुखता से दिया गया है। पांडेय ने कर्ज के बोझ से खुद को उबारने की अंतिम सांस तक कोशिश की, मगर हर तरफ से निराशा मिली तो जीवन की अंतिम राह आसान लगी।


 
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BJP
हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडेय के भाजपा मुख्यालय पर छह जनवरी को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार में सल्फास का सेवन करने के बाद से खुफिया तंत्र और पुलिस पांडेय की कुंडली तैयार करने में जुटी थी। पांडेय की काल डिटेल के माध्यम से उन लोगों से बात की गई, जिनसे आखिरी दौर में उन्होंने बातचीत की। बस कंडेक्टर से लेकर ट्रांसपोर्टर तक के पूरे सफर को खंगाला गया।

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BJP
हल्द्वानी में किराए पर रहने वाले ट्रांसपोर्टर के दो ट्रक और दो डंपर थे, जो ऋण पर लिए गए थे। बैंक खातों के अलावा ऋण का पूरा हिसाब-किताब लगाया गया। जुलाई से पांडेय बैंकों की किश्त नहीं दे पा रहे थे। बड़ी बात यह है कि कारोबार में घाटे के साथ उनकी रकम भी फंस गई थी।
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bjp
पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक कंपनी पर उनकी तीन लाख रुपये और दूसरी पर करीब आठ लाख की रकम बकाया था, जो काफी दिनो से मिल नहीं पा रही थी। पांडेय ने कर्ज के बोझ से उबारने को पर्सनल ऋण लेने का भी प्रयास किया, मगर ऋण नहीं मिल पाया।
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bjp
ट्रांसपोर्टर से आरबीआई, प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की भरसक कोशिश की। लेकिन कहीं से मदद न मिलने पर लगातार वह निराशा के दल-दल में फंसते चले गए। पुलिस सूत्रों की मानें तो वह बीच-बीच में वो खुदकुशी की धमकी देते रहते थे। आखिर में प्रकाश पांडेय ने मौत को गले लगाने का फैसला ले लिया, मगर वह गुमनामी की मौत नहीं चाहते थे। वो मंत्री के जनता दरबार में दिल की भड़ास निकालकर सरकार को जरूर पसीना-पसीना कर गए।
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