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मिशन-2019 के लिए यहां PM नरेंद्र मोदी ने खेला बड़ा दांव

Thu, 26 Oct 2017 08:23 AM IST
विपिन बनियाल/ अमर  उजाला, देहरादून
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pm modi in kedarnath dham
ये कोई चुनावी माहौल नहीं था। न ही कोई चुनावी सभा थी। मगर पीएम नरेंद्र मोदी का अंदाज चुनावी था। उन्होंने जनता के बीच ऐसा दांव खेला कि राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
 
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pm modi in kedarnath dham - फोटो : amar ujala
केदारपुरी में गढ़वाली में उनके मुंह से निकले चंद अल्फाजों ने लोगों को कुछ महीने पहले की श्रीनगर की सभा की याद दिला दी। तब भी लोगों से मुखाबित होने के लिए पीएम के मुंह से शुरुआती शब्द गढ़वाली के ही निकले थे। मोदी उत्तराखंड से उसी के अंदाज में कनेक्ट हुए। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र केदारनाथ के कायाकल्प का संकल्प जताकर उन्होंने पूरे देश के साथ जुड़ने की कोशिश भी की है।
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pm modi in kedarnath dham
2019 के लोकसभा चुनाव में पांच सीटों वाले अपेक्षाकृत छोटे राज्य को लेकर मोदी की भरपूर तवज्जो के मायने साफ दिखे हैं। मिशन 2019 के लिए मोदी ने अपनी तरफ से कसी हुई फील्डिंग सजा दी है। हरीश रावत सरकार के जमाने में केदारनाथ के मुद्दे को जिस तरह से कांग्रेस ने पकड़ लिया था, उसे मोदी ने अब पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। जाहिर तौर पर भाजपा गदगद है।

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pm modi in kedarnath dham
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का उत्तराखंड प्रवास जहां पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को एक्टिव कर गया है, वहीं मोदी का दौरा उनमें जोश भरने वाला साबित हुआ है। त्रिवेंद्र सरकार के लिए ये चुनौती जरूर है कि केदारपुरी में समयबद्घ ढंग से विकास कार्य होने की जो अपेक्षा पीएम ने की है, वह उसमें खरा उतरे। दरअसल, केदारनाथ विकास प्राधिकरण की भले ही कांग्रेस आलोचना कर रही हो, लेकिन केदारपुरी की नई शक्ल तैयार करने के लिए भाजपा सरकार को यह पहली शर्त नजर आ रही है। इसीलिए हर विरोध को दरकिनार कर भाजपा सरकार इस पर ही आगे बढ़ रही है।

 
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pm modi in kedarnath dham
मोदी के भाषणों से जो प्रतिध्वनि उभरी, उसमें केदारनाथ के लिए भविष्य में बहुत कुछ करने का वह भरोसा दिलाते हुए भी दिखाई दिए। केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थल का इस्तेमाल उन्होंने सियासी वार-पलटवार के लिए भी किए। उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण के काम से अलग रखे जाने का जिक्र किया, तो प्रधानमंत्री बन जाने के बावजूद कई साल तक इस काम में हाथ न डालने की वजह भी बताई।

 
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pm moodi
मोदी जब केदारनाथ के कपाट खुलने के मौके पर आए थे, तब उन्होंने एक शब्द नहीं बोला था। लोग उनसे केदारनाथ पर कुछ सुनना चाहते थे, लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने के लिए ठीक पांच महीने का इंतजार किया। इस बीच, केदारनाथ पर कई चीजें आगे बढ़ गईं, तो मोदी को लोगों से मुखातिब होना मुनासिब लगा। यही कारण रहा, कि वह केदारपुरी में जमकर बोले। साथ ही उत्तराखंड भाजपा के लिए चुनावी तैयारियों में जुटने का आधार भी बना गए।
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